मान्यता: पशुओं में बीमारी न आए इसलिए 24 घंटे सील रहेगा रोहतक का यह गांव, मंदिर को छोड़कर कहीं नहीं जलेगा चूल्हा

संवाद न्यूज एजेंसी, महम/रोहतक (हरियाणा) Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Sun, 17 Oct 2021 02:36 AM IST

सार

गांव भैणी चंद्रपाल गांव में मंगलवार शाम पांच बजे से बुधवार शाम पांच बजे तक आवागमन नहीं होगा। किसी भी ग्रामीण को शराब पीने व अन्य नशा करने के लिए मना किया गया है। मान्यता है कि इस तरह गांव में बंद लगाने से पशुओं में होने वाली बीमारी को रोका जा सकता है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

महम (रोहतक) से चार किलोमीटर दूर महम-फरमाना रोड पर बसे गांव भैणी चंद्रपाल गांव में मंगलवार शाम पांच बजे से बुधवार शाम पांच बजे तक आवागमन नहीं होगा। इस दौरान मंदिर को छोड़कर कहीं पर भी चूल्हा नहीं जलेगा। यह निर्णय गांव में आयोजित पंचायत में लिया गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से पशुओं में मुंह खुर व दर्द का रोग नहीं आता।
विज्ञापन


पूर्व सरपंच ज्ञान सिंह की अध्यक्षता में शनिवार को गांव में पंचायत का आयोजन किया गया। इसमें गांव के पंडित वेद ने अन्य पंडित से सलाह कर कार्तिक की पूर्णिमा का दिन इस काम के लिए शुभ माना। बताया गया कि गांव के लोग पंजाब के मलेरकोटला स्थित नवाब के यहां से धागा लेकर आएंगे, जिसे आम भाषा में गंडा कहा जाता है और वह मंगलवार शाम पांच बजे से पहले गांव में पहुंचेंगे। उसके बाद न बाहर से कोई गांव में आ सकेगा और न जा सकेगा।


गांव के पंडित ने बताया कि इस दौरान हर घर में गुगल धूप की धूनी पहुंचाई जाएगी। कोई परिवार का सदस्य मंगलवार शाम पांच बजे व बुधवार शाम पांच बजे के बीच घर में खाना नहीं पकाएगा। न ही आग जलेगी। इस दौरान गांव के मंदिर व तालाब के पास पूरे गांव का दूध एकत्रित कर खीर बनाई जाएगी। ग्रामीण वहीं पर खीर का प्रसाद ग्रहण करेंगे। इस दौरान गांव का कोई खेतों में भी नहीं जा सकेगा।

गांव से होकर निकलने वाली सड़क भी रहेगी बंद
गांव से निकलने वाला महम जुलाना मार्ग भी बंद रहेगा। किसी भी ग्रामीण को शराब पीने व अन्य नशा करने के लिए मना किया गया है। मान्यता है कि इस तरह गांव में बंद लगाने से पशुओं में होने वाली बीमारी को रोका जा सकता है। बताया जा रहा है कि यह परंपरा तब से है, जब यहां पर पंजाब के मलेर कोटला के किसी नवाब का राज्य होता था। यह उस समय के राजा द्वारा परंपरा शुरू की गई थी। सबसे पहले ग्रामीण गांव के चारों ओर धूनी देंगे, जिसे कार कहा जाता है। इस दिन सभी लोग अपने घर का दूध मंदिर में पहुंचाएंगे। तालाब के किनारे भजन-कीर्तन चलता रहेगा।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00