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Yamuna Nagar News: पौधरोपण का लक्ष्य घटा मुफ्त में नहीं मिलेंगे पौधे
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 27 May 2026 01:47 AM IST
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जगाधरी वन रेंज की नर्सरी में तैयार किए गए पौधे। संवाद
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राजेश कुमार
यमुनानगर। इस बार मानसून सीजन में वन विभाग की ओर से पौधरोपण का लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम कर दिया गया है। पिछले साल जिले में करीब 13 लाख 70 हजार पौधे लगाए गए थे। इस बार एक लाख दो हजार 500 पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है। साथ ही लोगों को पौधे मुफ्त देने पर रोक लगा दी गई है।
वन विभाग ने अपनी विभिन्न नर्सरियों में इस साल के लिए पहले ही सात लाख 49 हजार 682 पौधे तैयार कर लिए हैं। इनमें जगाधरी रेंज में एक लाख 64 हजार 596, साढौरा रेंज में दो लाख 24 हजार 259, छछरौली रेंज में एक लाख 72 हजार 40 और कलेसर रेंज में एक लाख 88 हजार 787 पौधे शामिल हैं।
वन विभाग की नर्सरियों में इस बार जामुन, शीशम, अर्जुन, बेहड़ा, आंवला, बेलपत्र, नीम, तुन, पापड़ी, अमरूद, आम, बकैन और विभिन्न फूलदार पौधे तैयार किए गए हैं। विभाग को उम्मीद थी कि मानसून सीजन में बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा, लेकिन लक्ष्य कम होने से पूरी तैयारी अधर में लटकती नजर आ रही है।
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वन विभाग के मुख्यालय से इस बार मुफ्त में पौधे वितरित नहीं करने का भी फैसला लिया है। पिछले वर्षों में स्कूलों, किसानों, समाजसेवियों, एनजीओ और सरकारी विभागों को बड़ी संख्या में पौधे निशुल्क दिए जाते थे। पिछले साल करीब साढ़े तीन लाख पौधे मुफ्त बांटे गए थे।
विभागीय जांच में सामने आया कि मुफ्त दिए गए पौधों में से 60 से 70 प्रतिशत पौधे लगाए ही नहीं गए। कई मामलों में स्कूलों से पौधे लेने वाले विद्यार्थी उन्हें घर पहुंचने से पहले ही रास्ते में फेंक देते थे। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि लोग पौधे खरीद कर लगाएंगे तो इनकी देखभाल भी अच्छे से कर सकेंगे।
इससे नर्सरियों में रखरखाव का खर्च बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है। अभी अधिकांश पौधे छोटे पॉलीथिन बैग में तैयार किए गए हैं। समय के साथ पौधों की जड़ें पॉलीथिन फाड़कर जमीन में पहुंचने लगेंगी। ऐसे में यदि इन्हें बड़े बैग में शिफ्ट करना पड़ा तो विभाग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। संवाद
हरियाली पर पड़ सकता असर
हरियाणा इन्वायरमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष एसएल सैनी का कहना है कि पौधरोपण लक्ष्य में भारी कमी का असर जिले की हरियाली पर दिखाई दे सकता है। पिछले कुछ वर्षों से जिले में बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाए जा रहे थे, जिससे पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने में मदद मिली थी। अब लक्ष्य घटने से आने वाले वर्षों में इसका असर पर्यावरण संतुलन और हरित आवरण पर पड़ सकता है। यदि पौधे मुफ्त नहीं देने हैं तो नगर निगम या फिर पंचायतों की हजारों एकड़ खाली जमीन पर पौधे लगाए जा सकते हैं।
वन विभाग की नर्सरियों में पौधे तैयार हैं। पौधरोपण के कुछ प्रोजेक्ट के पत्र पहले आ जाते हैं और कुछ बाद में। वहीं मुफ्त पौधे देने के फिलहाल कोई आदेश नहीं है।
- संदीप सैनी, जिला वन अधिकारी, यमुनानगर।
यमुनानगर। इस बार मानसून सीजन में वन विभाग की ओर से पौधरोपण का लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम कर दिया गया है। पिछले साल जिले में करीब 13 लाख 70 हजार पौधे लगाए गए थे। इस बार एक लाख दो हजार 500 पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है। साथ ही लोगों को पौधे मुफ्त देने पर रोक लगा दी गई है।
वन विभाग ने अपनी विभिन्न नर्सरियों में इस साल के लिए पहले ही सात लाख 49 हजार 682 पौधे तैयार कर लिए हैं। इनमें जगाधरी रेंज में एक लाख 64 हजार 596, साढौरा रेंज में दो लाख 24 हजार 259, छछरौली रेंज में एक लाख 72 हजार 40 और कलेसर रेंज में एक लाख 88 हजार 787 पौधे शामिल हैं।
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वन विभाग की नर्सरियों में इस बार जामुन, शीशम, अर्जुन, बेहड़ा, आंवला, बेलपत्र, नीम, तुन, पापड़ी, अमरूद, आम, बकैन और विभिन्न फूलदार पौधे तैयार किए गए हैं। विभाग को उम्मीद थी कि मानसून सीजन में बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा, लेकिन लक्ष्य कम होने से पूरी तैयारी अधर में लटकती नजर आ रही है।
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विभागीय जांच में सामने आया कि मुफ्त दिए गए पौधों में से 60 से 70 प्रतिशत पौधे लगाए ही नहीं गए। कई मामलों में स्कूलों से पौधे लेने वाले विद्यार्थी उन्हें घर पहुंचने से पहले ही रास्ते में फेंक देते थे। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि लोग पौधे खरीद कर लगाएंगे तो इनकी देखभाल भी अच्छे से कर सकेंगे।
इससे नर्सरियों में रखरखाव का खर्च बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है। अभी अधिकांश पौधे छोटे पॉलीथिन बैग में तैयार किए गए हैं। समय के साथ पौधों की जड़ें पॉलीथिन फाड़कर जमीन में पहुंचने लगेंगी। ऐसे में यदि इन्हें बड़े बैग में शिफ्ट करना पड़ा तो विभाग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। संवाद
हरियाली पर पड़ सकता असर
हरियाणा इन्वायरमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष एसएल सैनी का कहना है कि पौधरोपण लक्ष्य में भारी कमी का असर जिले की हरियाली पर दिखाई दे सकता है। पिछले कुछ वर्षों से जिले में बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाए जा रहे थे, जिससे पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने में मदद मिली थी। अब लक्ष्य घटने से आने वाले वर्षों में इसका असर पर्यावरण संतुलन और हरित आवरण पर पड़ सकता है। यदि पौधे मुफ्त नहीं देने हैं तो नगर निगम या फिर पंचायतों की हजारों एकड़ खाली जमीन पर पौधे लगाए जा सकते हैं।
वन विभाग की नर्सरियों में पौधे तैयार हैं। पौधरोपण के कुछ प्रोजेक्ट के पत्र पहले आ जाते हैं और कुछ बाद में। वहीं मुफ्त पौधे देने के फिलहाल कोई आदेश नहीं है।
- संदीप सैनी, जिला वन अधिकारी, यमुनानगर।