{"_id":"6a158d7ad6d6d63d3001b295","slug":"the-288-year-old-golden-dome-of-the-jwalamukhi-temple-will-once-again-shine-kangra-news-c-95-1-kng1047-236469-2026-05-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: ज्वालामुखी मंदिर के 288 साल पुराने स्वर्णिम गुंबद की फिर लौटेगी चमक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: ज्वालामुखी मंदिर के 288 साल पुराने स्वर्णिम गुंबद की फिर लौटेगी चमक
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 27 May 2026 05:38 AM IST
विज्ञापन
ज्वालामुखी मंदिर के गुंबद की सफाई में जुटे दिल्ली के विशेषज्ञ। -संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर के गर्भगृह के ऊपर स्थापित ऐतिहासिक गोल्ड प्लेटेड छत्र (गुंबद) की पुरानी स्वर्णिम चमक जल्द ही वापस लौटेगी। मंदिर प्रशासन ने वर्षों बाद ऐतिहासिक धरोहर की सफाई और मरम्मत करवाने का फैसला लिया है। इससे न केवल गुंबद की फीकी पड़ रही चमक को दोबारा निखारा जाएगा, बल्कि लीकेज जैसी तकनीकी समस्याओं को भी दुरुस्त किया जाएगा।
मंदिर के ऊपर स्थापित इस स्वर्णिम छत्र का इतिहास बेहद गौरवशाली है। इसका निर्माण वर्ष 1738 ईस्वी में महाराजा रणजीत सिंह ने करवाया था। इतिहास के पन्नों के अनुसार इसी छत्र की तर्ज पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब) और काशी विश्वनाथ मंदिर में भी स्वर्णिम गुंबद तैयार किए गए थे। लंबे समय से उचित और वैज्ञानिक ढंग से सफाई न होने के कारण इसकी चमक कुछ फीकी पड़ने लगी थी।
मंदिर प्रशासन की इस पहल के बाद दिल्ली के श्रद्धालु और विशेषज्ञ ज्वेलर विजय ने इसके संरक्षण और सफाई का जिम्मा उठाया है। विजय ने अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ आधुनिक तकनीक और सुरक्षित रसायनों से गुंबद की सफाई का काम शुरू कर दिया है। इसमें खास ध्यान रखा जा रहा है कि सदियों पुरानी सोने की परत (गोल्ड प्लेटिंग) को नुकसान न पहुंचे। साथ ही गुंबद के आसपास की लीकेज को बंद करने का तकनीकी काम भी साथ-साथ किया जा रहा है।
विज्ञापन
मंगलवार सुबह एसडीएम ज्वालामुखी डॉ. संजीव शर्मा ने स्वयं मंदिर परिसर पहुंचकर शुरू हुए कार्य का जायजा लिया। उन्होंने विशेषज्ञ टीम और मंदिर के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। प्रशासन का कहना है कि शक्तिपीठ की ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण और मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उधर, मंदिर पुजारी सभा के प्रधान अविनेंद्र शर्मा ने कहा कि कार्य पूरा होने के बाद मंदिर का यह ऐतिहासिक स्वर्णिम छत्र अपनी प्राचीन और दिव्य आभा में लौट आएगा।
मंदिर के ऊपर स्थापित इस स्वर्णिम छत्र का इतिहास बेहद गौरवशाली है। इसका निर्माण वर्ष 1738 ईस्वी में महाराजा रणजीत सिंह ने करवाया था। इतिहास के पन्नों के अनुसार इसी छत्र की तर्ज पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब) और काशी विश्वनाथ मंदिर में भी स्वर्णिम गुंबद तैयार किए गए थे। लंबे समय से उचित और वैज्ञानिक ढंग से सफाई न होने के कारण इसकी चमक कुछ फीकी पड़ने लगी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
मंदिर प्रशासन की इस पहल के बाद दिल्ली के श्रद्धालु और विशेषज्ञ ज्वेलर विजय ने इसके संरक्षण और सफाई का जिम्मा उठाया है। विजय ने अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ आधुनिक तकनीक और सुरक्षित रसायनों से गुंबद की सफाई का काम शुरू कर दिया है। इसमें खास ध्यान रखा जा रहा है कि सदियों पुरानी सोने की परत (गोल्ड प्लेटिंग) को नुकसान न पहुंचे। साथ ही गुंबद के आसपास की लीकेज को बंद करने का तकनीकी काम भी साथ-साथ किया जा रहा है।
Trending Videos
मंगलवार सुबह एसडीएम ज्वालामुखी डॉ. संजीव शर्मा ने स्वयं मंदिर परिसर पहुंचकर शुरू हुए कार्य का जायजा लिया। उन्होंने विशेषज्ञ टीम और मंदिर के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। प्रशासन का कहना है कि शक्तिपीठ की ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण और मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उधर, मंदिर पुजारी सभा के प्रधान अविनेंद्र शर्मा ने कहा कि कार्य पूरा होने के बाद मंदिर का यह ऐतिहासिक स्वर्णिम छत्र अपनी प्राचीन और दिव्य आभा में लौट आएगा।

ज्वालामुखी मंदिर के गुंबद की सफाई में जुटे दिल्ली के विशेषज्ञ। -संवाद