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यूसुफ भी बदलेंगे पाला?: 'रीढ़ मजबूत' वाली महुआ की नसीहत के मायने क्या? बागी सांसदों की संख्या पर संशय बरकरार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Tue, 09 Jun 2026 09:00 AM IST
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सार

तृणमूल कांग्रेस में बड़ी बगावत सामने आई है। काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में करीब 20 सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने का दावा किया है। पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान का नाम भी बागी गुट में चर्चा में है। महुआ मोइत्रा ने उन पर तीखा हमला भी बोला है। आइए, विस्तार से इस पूरे राजनीतिक गणित को समझते हैं...

Bengal politics Mahua Moitra over Yusuf Pathan TMC rebellion Mamata Banerjee TMC crisis Kakoli Ghosh Dastidar
तृणमूल में अंतर्कलह - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर बगावत खुलकर सामने आ गई है और पार्टी के कई सांसद अब खुलकर ममता बनर्जी के खिलाफ खड़े दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि टीएमसी के करीब 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ टीएमसी बल्कि इंडिया गठबंधन की राजनीति को भी हिला दिया है। सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान के नाम को लेकर हो रही है, जिनके भी इस बागी गुट में शामिल होने की बात कही जा रही है।



 

आखिर टीएमसी में बगावत क्यों बढ़ गई?

टीएमसी सांसद और वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि पार्टी के लगभग 20 सांसद एनडीए को समर्थन देने के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर अलग संसदीय गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की है। अगर यह संख्या सही साबित होती है, तो बागी सांसद दलबदल रोधी कानून से बच सकते हैं, क्योंकि इसके लिए दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। ऐसे में 19 सांसदों का साथ मिलना पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

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यूसुफ पठान का नाम क्यों चर्चा में आया?

पूर्व क्रिकेटर और बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान का नाम इस पूरे विवाद के केंद्र में आ गया है। हालांकि उन्होंने अब तक खुलकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन टीएमसी की ही नेता काकोली घोष दस्तीदार ने संकेत दिए हैं कि पठान भी बागी सांसदों के साथ हैं। दूसरी ओर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी यूसुफ पठान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर अमित शाह का फोन आने पर वह दिल्ली जा रहे हैं, तो उन्हें थोड़ा साहस दिखाना चाहिए। रीढ़ की हड्डी को मजबूत रखना चाहिए। महुआ ने यह भी कहा कि जनता ने उन्हें टीएमसी के टिकट पर जिताया है, इसलिए उन्हें पार्टी के साथ खड़ा रहना चाहिए।

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भाजपा नेताओं से मुलाकात के क्या मायने हैं?

सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों के एक समूह ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की। इस बैठक की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर सामने आईं। तस्वीरों में कई टीएमसी सांसद दिखाई दिए। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के बड़े नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी इन सांसदों से मुलाकात की। हालांकि बागी गुट ने साफ किया है कि वे तुरंत भाजपा में शामिल नहीं होंगे। उनका कहना है कि वे अलग गुट बनाकर एनडीए को समर्थन देंगे। माना जा रहा है कि यह रणनीति दलबदल रोधी कानून से बचने के लिए बनाई गई है।

ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें कैसे बढ़ीं?

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है, जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। उसी दौरान पार्टी के भीतर यह बगावत तेज हो गई। टीएमसी के भीतर अब दो खेमे साफ दिखाई देने लगे हैं। एक तरफ ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के करीबी नेता हैं, जबकि दूसरी तरफ बागी सांसदों का समूह खड़ा नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि कई सांसद अभी भी खुलकर सामने आने से बच रहे हैं और स्थिति को देख रहे हैं।

क्या टीएमसी में टूट अब तय मानी जा रही है?

टीएमसी के इतिहास में पहले भी कई नेता पार्टी छोड़ चुके हैं, लेकिन इतने बड़े स्तर पर सांसदों की बगावत पहली बार सामने आई है। अगर बागी गुट को आधिकारिक मान्यता मिलती है, तो इससे संसद में एनडीए की ताकत और बढ़ जाएगी। अभी एनडीए के पास लोकसभा में बहुमत से ज्यादा सीटें हैं, लेकिन टीएमसी के बड़े गुट का समर्थन मिलने से उसकी स्थिति और मजबूत हो सकती है। वहीं टीएमसी के सामने अब पार्टी की पहचान, संगठन और भविष्य को बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। 

क्या कानूनी और राजनीतिक लड़ाई अब और तेज होगी?

इस पूरे मामले में कानूनी विवाद भी शुरू हो गया है। काकोली घोष दस्तीदार ने पत्र पर खुद को टीएमसी का मुख्य सचेतक बताया, जबकि पार्टी उन्हें पहले ही इस पद से हटा चुकी है। टीएमसी नेतृत्व ने उनके दावे को गलत बताया है। दूसरी ओर बागी सांसद लगातार दावा कर रहे हैं कि उनके साथ 20 सांसद हैं। अब सबकी नजर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले पर टिकी है। अगर बागी गुट को अलग पहचान मिलती है, तो यह ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक संकट साबित हो सकता है।

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