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Bombay HC: आदिवासी महिला के गर्भ में ही जुड़वां बच्चों की मौत पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता,जानें पूरा मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 17 Aug 2022 11:39 PM IST
सार

बंबई उच्च न्यायालय ने पालघर में चिकित्सीय सुविधाओं के अभाव में आदिवासी महिला द्वारा मृत अवस्था में जुड़वां बच्चों के जन्म देने की घटना पर चिंता जताई है। पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि वह इस बात को लेकर चिंतित है कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और मृत जन्म के मामलों की संख्या कम नहीं हो रही है।

बंबई उच्च न्यायालय
बंबई उच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र के पालघर जिले में समय पर अस्पताल ना पहुंच पाने के कारण आदिवासी गर्भवती महिला के गर्भ में ही जुड़वां बच्चों की मौत पर बुधवार को चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक की खंडपीठ वर्ष 2006 में दायर जनहित याचिकाओं (पीआईएल) के एक समूह पर सुनवाई कर रही थी। 



मुख्य न्यायाधीश दत्ता ने जताई चिंता
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश दत्ता ने कहा कि हमने आज अखबारों में पालघर की घटना के बारे में पढ़ा। महिला को एक पालकी में अस्पताल ले जाया गया था। महिला के अस्पताल पहुंचने से पहले शिशु की मौत हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि "यह पालघर में है। हम इस मामले की सुनवाई साल 2006 से कर रहे हैं और अब हम 2022 में है। 16 साल हो गए हैं... यह अदालत समय-समय पर इसके लिए निर्देश देती रही है।"


जनहित याचिकाओं पर की सुनवाई 
साल 2006 में दायर जनहित याचिकाओं (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में पूर्वी महाराष्ट्र के मेलघाट क्षेत्र में कुपोषण के कारण बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं की मृत्यु के बारे में अपील की गई है। पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि वह इस बात को लेकर चिंतित है कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और मृत जन्म के मामलों की संख्या कम नहीं हो रही है।

एक याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय को बताया कि आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं अभी भी उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में सेवा के लिए सरकार द्वारा नियुक्त डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं आते हैं। इस पर सरकारी वकील पीपी काकड़े ने हाईकोर्ट से कहा कि अगर डॉक्टर अपने ड्यूटी क्षेत्रों में रिपोर्ट नहीं करते हैं तो उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद भी अगर ने ऐसा करते हैं तो ऐसे डॉक्टरों को सेवा से हटा दिया जाएगा। पीठ ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 12 सितंबर की तारीख दी है। 

पालघर में प्रसव से पहले गर्भ में हुई थी बच्चों की मौत
दरअसल, सोमवार को मुंबई से 155 किलोमीटर दूर पालघर जिले के मोखाड़ा की 26 वर्षीय आदिवासी महिला को समय से पूर्व ही प्रसव पीड़ा हुई। महिला उस समय सात माह की गर्भवती थी। उसे पालकी से मेडिकल सेंटर ले जाना पड़ा। बाद में उसे मेन रोड़ से एम्बुलेंस के जरिए खोडाला पीएचसी (सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र) लाया गया। जहां उसने मृत जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। इसी मामले में बांबे हाईकोर्ट ने चिंता जाहिर की। 

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