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Chhattisgarh: गोबर के बाद किसानों से चार रुपये प्रति लीटर गोमूत्र खरीदेगी सरकार, भूपेश बघेल बने पहले विक्रेता

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 29 Jul 2022 05:04 PM IST
सार

Chhattisgarh: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसी साल अप्रैल-मई में गोमूत्र खरीदी की घोषणा की थी। इसके बाद कृषि विभाग ने कामधेनु विश्वविद्यालय और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से गोमूत्र के वैल्यू एडिशन पर एक अध्ययन कराया। इसके बाद इसकी चरणबद्ध तरीके से शुरुआत की जा रही है...

Chhattisgarh: गोमूत्र बेचते भूपेश बघेल
Chhattisgarh: गोमूत्र बेचते भूपेश बघेल - फोटो : Agency
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विस्तार

छत्तीसगढ़ सरकार ने अब गोबर खरीदने के बाद किसानों से गोमूत्र खरीदना शुरू कर दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश में पहली गोमूत्र खरीदने योजना शुरू की है। इस योजना के तहत सीएम पहले गोमूत्र विक्रेता बने। पहले ही दिन उन्होंने पांच लीटर गोमूत्र बेचा। समूह द्वारा उन्हें 20 रुपये का भुगतान भी किया गया। मुख्यमंत्री अपनी गोशाला से पांच लीटर के गैलन में गोमूत्र लेकर आए थे। जिसे पहले मापा गया। सीएम ने बकायदा रजिस्टर पर विक्रेता के रूप में अपने दस्तखत भी किए। छत्तीसगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के तहत हर जिले के दो गोठानों में गोमूत्र खरीदी की जाएगा। सीएम ने दुर्ग जिले के पाटन से इसकी शुरुआत की।


 

दरअसल, छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने गोधन न्याय योजना के तहत अब गोबर के अलावा गोमूत्र खरीदी भी हरेली पर्व से शुरू कर दी है। राज्य सरकार चार रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र की खरीदी करेगी। गोबर से जिस तरह जैविक खाद बनाकर बेचा जा रहा है। उसी तरह से गोमूत्र से जैविक कीटनाशक बनाकर गोठान समितियों और महिला स्व.सहायता समूहों के माध्यम से बेचा जाएगा। हरेली पर्व पर मुख्यमंत्री निवास में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। चंदखुरी की निधि स्व.सहायता समूह ने गोमूत्र खरीदने के लिए स्टॉल लगाया था। जहां सीएम ने पांच लीटर गोमूत्र बेचकर 20 रुपये कमाए। हरेली पर्व पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ठेठ छत्तीसगढ़िया अंदाज भी देखने को मिला। सीएम ने गेड़ी और रेईचुली का आनंद भी लिया।


 

 

प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसी साल अप्रैल-मई में गोमूत्र खरीदी की घोषणा की थी। इसके बाद कृषि विभाग ने कामधेनु विश्वविद्यालय और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से गोमूत्र के वैल्यू एडिशन पर एक अध्ययन कराया। इसके बाद इसकी चरणबद्ध तरीके से शुरुआत की जा रही है। सरकार इस योजना के जरिए मवेशी पालन से जुड़े लोगों की कमाई के स्रोत बढ़ाने और ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देना चाहती है। वहीं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।
 

 

गोमूत्र की खरीदी से राज्य में जैविक खेती के प्रयासों को और आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे पशुपालकों को गोमूत्र बेचकर अतिरिक्त आय होगी। वहीं महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से जीवामृत कीट नियंत्रक उत्पाद आदि तैयार किए जाने से रोजगार का जरिया मिलेगा। इन जैविक उत्पादों का उपयोग किसान भाई रासायनिक कीटनाशक के बदले कर सकेंगे जिससे कृषि में लागत कम होगी।
 

 

सरकार से जुड़े सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने गोधन न्याय मिशन के तहत सभी कलेक्टरों को गौठानों में गोमूत्र की खरीदी को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के लिए कहा है। सरकार गोमूत्र की खरीदी गौठान प्रबंधन समिति के खाते में उपलब्ध गोधन न्याय योजना से मिली राशि और उसकी ब्याज राशि से करेगी। इसके लिए सभी जिलों के कलेक्टर अपने-अपने जिले के दो स्वावलंबी गौठानों, स्वसहायता समूह का चयन करेंगे। गौठान प्रबंध समिति और स्वसहायता समूह के सदस्यों को प्रशिक्षण देने के साथ ही गौमूत्र परीक्षण संबंधी किट एवं उत्पाद भण्डारण हेतु आवश्यक व्यवस्था करेगी।

 

दो साल पहले हरेली पर्व पर शुरू हुई थी गोबर खरीदी

दो साल पहले 20 जुलाई 2020 को प्रदेश में हरेली पर्व के दिन से ही गोधन न्याय योजना के तहत गोठानों में दो रुपये प्रति किलो की दर से गोबर खरीदी की शुरुआत हुई थी। गोबर से गोठानों में अब तक 20 लाख क्विंटल से अधिक वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट, सुपर प्लस कम्पोस्ट महिला स्वसहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा चुके हैं। जिससे प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा मिला है। गोमूत्र की खरीदी राज्य में जैविक खेती के प्रयासों को और आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगी। छत्तीसगढ़ सरकार दो सालों में 150 करोड़ से अधिक की गोबर की खरीदी की गई है।

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