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TMC की बढ़ीं मुश्किलें?: फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच के लिए पार्टी मुख्यालय में घुसी CID की टीम, तलाशी ली
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 09 Jun 2026 05:20 PM IST
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सार
टीएमसी विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच के लिए सीआईडी की एक टीम आज पार्टी के मुख्यालय पहुंची। राज्य की जांच एजेंसी के मुताबिक, यह कार्रवाई टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बयान के आधार पर की जा ही है। टीएमसी नेताओं के साथ तनातनी के बीच जांच अधिकारियों ने पार्टी मुख्यालय में प्रवेश किया। पढ़िए रिपोर्ट-
ममता बनर्जी के कालीघाट कार्यालय पहुंची सीआईडी की टीम
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
जाली हस्ताक्षर मामले की जांच के तहत अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की एक टीम मंगलवार को कोलकाता के कालीघाट इलाके में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के केंद्रीय कार्यालय में घुसी। इस दौरान सुरक्षा कर्मियों और पार्टी के एक नेता के बीच थोड़ी देर बहस हुई, जिसके बाद जांच टीम ने अंदर प्रवेश किया।
सूत्रों ने बताया कि राज्य की जांच एजेंसी के अधिकारी, कालीघाट थाने की पुलिस और बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मियों के साथ देर दोपहर 30बी हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित पार्टी कार्यालय पहुंचे।
सीआईडी की यह कार्रवाई उस जांच का हिस्सा है, जो टीएमसी विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षरों से जुड़े विवाद पर चल रही है। यह मामला विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए एक प्रस्ताव से जुड़ा है, जिसमें नेता प्रतिपक्ष को मान्यता देने की मांग की गई थी।
अभिषेक बनर्जी के बायन के आधार की जा रही जांच: सीआईडी
ये भी पढ़ें: 24 घंटे में सोनिया से दूसरी बार मिलने पहुंचीं ममता, TMC में बगावत के बाद आगे की रणनीति हो सकती हैं चर्चा
ममता के साथ नई दिल्ली में हैं अभिषेक बनर्जी
अभिषेक बनर्जी इस समय ममता बनर्जी के साथ नई दिल्ली में हैं। सीआईडी ने उनको मंगलवार शाम पांच बजे तक पेश होने के लिए समन भेजा है।
टीएमसी नेता ने दी थी चेतावनी
शुरुआत में सुरक्षा कर्मियों ने जांच टीम को परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया, जिससे थोड़ी देर के लिए तनातनी की स्थिति बन गई। टीएमसी नेता और पूर्व सांसद सुभाशीष चक्रवर्ती ने पहले कहा था कि अभिषेक बनर्जी की गैरमौजूदगी में पार्टी ने तलाशी की अनुमति नहीं देगी। उन्होंने कहा था कि अभिषेक बनर्जी की गैरमौजूदगी में सीआईडी को अंदर आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। लेकिन बाद में स्थिति बदल गई और सीआईडी ने अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर हल्के विरोध की स्थिति के बावजूद परिसर में प्रवेश कर लिया।
कालीघाट थाने के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और सुरक्षा कर्मियों से बहस करते नजर आए। अधिकारियों ने उन्हें जांच में बाधा न डालने को कहा। सूत्रों के अनुसार, इसके बाद सीआईडी टीम ने पार्टी कार्यालय परिसर में प्रवेश कर जांच और दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की। इसी मामले में सीआईडी की एक अन्य टीम ने कोलकाता के कैमैक स्ट्रीट स्थित अभिषेक बनर्जी के कार्यालय में भी तलाशी ली।
पूरा विवाद कहां से शुरू हुआ?
यह टीएमसी के 28 साल के इतिहास का सबसे बड़ा अंदरूनी संकट माना जा रहा है। विवाद तब शुरू हुआ, जब विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए एक प्रस्ताव में वरिष्ठ टीएमसी विधायक सोवनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाने की सिफारिश की गई थी। लेकिन उस पर कई विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी बताए गए।
इसके बाद प्राथमिकी दर्ज हुई और सीआईडी जांच शुरू की गई। यह संकट विधानसभा चुनाव के बाद नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर शुरू हुई अंदरूनी खींचतान से जुड़ा है। स्थिति तब और बिगड़ गई, जब टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ जाकर बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन किया।
पिछले हफ्ते हुए घटनाक्रम में इस गुट ने विधानसभा में पार्टी पर नियंत्रण हासिल कर लिया, ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चुना और विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता भी प्राप्त कर ली, जिससे टीएमसी में पहली बार आधिकारिक विभाजन की स्थिति बन गई।
सूत्रों ने बताया कि राज्य की जांच एजेंसी के अधिकारी, कालीघाट थाने की पुलिस और बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मियों के साथ देर दोपहर 30बी हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित पार्टी कार्यालय पहुंचे।
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#WATCH | A team of CID at the residence of Former Chief Minister of West Bengal, Mamata Banerjee, in Kolkata pic.twitter.com/uQg0cGLIDr
विज्ञापन — ANI (@ANI) June 9, 2026
सीआईडी की यह कार्रवाई उस जांच का हिस्सा है, जो टीएमसी विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षरों से जुड़े विवाद पर चल रही है। यह मामला विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए एक प्रस्ताव से जुड़ा है, जिसमें नेता प्रतिपक्ष को मान्यता देने की मांग की गई थी।
अभिषेक बनर्जी के बायन के आधार की जा रही जांच: सीआईडी
- सीआईडी ने यह जांच अभिषेक बनर्जी के जवाब के आधार पर शुरू की।
- उन्होंने कहा था कि विधायकों के हस्ताक्षर इसी पार्टी कार्यालय में लिए गए थे।
- इसी बयान को आधार बनाकर सीआईडी टीम मौके पर पहुंची।
- जांच के दौरान टीम को शुरू में अंदर जाने से रोका गया।
- इस वजह से अंदर मौजूद लोगों से थोड़ी बहस भी हुई।
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ममता के साथ नई दिल्ली में हैं अभिषेक बनर्जी
अभिषेक बनर्जी इस समय ममता बनर्जी के साथ नई दिल्ली में हैं। सीआईडी ने उनको मंगलवार शाम पांच बजे तक पेश होने के लिए समन भेजा है।
टीएमसी नेता ने दी थी चेतावनी
शुरुआत में सुरक्षा कर्मियों ने जांच टीम को परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया, जिससे थोड़ी देर के लिए तनातनी की स्थिति बन गई। टीएमसी नेता और पूर्व सांसद सुभाशीष चक्रवर्ती ने पहले कहा था कि अभिषेक बनर्जी की गैरमौजूदगी में पार्टी ने तलाशी की अनुमति नहीं देगी। उन्होंने कहा था कि अभिषेक बनर्जी की गैरमौजूदगी में सीआईडी को अंदर आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। लेकिन बाद में स्थिति बदल गई और सीआईडी ने अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर हल्के विरोध की स्थिति के बावजूद परिसर में प्रवेश कर लिया।
कालीघाट थाने के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और सुरक्षा कर्मियों से बहस करते नजर आए। अधिकारियों ने उन्हें जांच में बाधा न डालने को कहा। सूत्रों के अनुसार, इसके बाद सीआईडी टीम ने पार्टी कार्यालय परिसर में प्रवेश कर जांच और दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की। इसी मामले में सीआईडी की एक अन्य टीम ने कोलकाता के कैमैक स्ट्रीट स्थित अभिषेक बनर्जी के कार्यालय में भी तलाशी ली।
पूरा विवाद कहां से शुरू हुआ?
यह टीएमसी के 28 साल के इतिहास का सबसे बड़ा अंदरूनी संकट माना जा रहा है। विवाद तब शुरू हुआ, जब विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए एक प्रस्ताव में वरिष्ठ टीएमसी विधायक सोवनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाने की सिफारिश की गई थी। लेकिन उस पर कई विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी बताए गए।
इसके बाद प्राथमिकी दर्ज हुई और सीआईडी जांच शुरू की गई। यह संकट विधानसभा चुनाव के बाद नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर शुरू हुई अंदरूनी खींचतान से जुड़ा है। स्थिति तब और बिगड़ गई, जब टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ जाकर बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन किया।
पिछले हफ्ते हुए घटनाक्रम में इस गुट ने विधानसभा में पार्टी पर नियंत्रण हासिल कर लिया, ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चुना और विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता भी प्राप्त कर ली, जिससे टीएमसी में पहली बार आधिकारिक विभाजन की स्थिति बन गई।