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जज्बे को सलाम: पानी से घिरे 137 लोगों को 'कोरोना' से बचा लिया, खुद नाव चलाकर मेडिकल टीम को टापू तक ले गईं 'कमला'

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 05 Aug 2021 06:48 PM IST

सार

सीमलवाड़ा के बीसीएमओ डॉ. नरेंद्र प्रजापत ने बताया कि ओड़ाफला तथा बेडफला टापू पर कुल 32 मकानों में 137 लोग रहते हैं। दोनों टापू सालभर पानी से घिरे रहते हैं। सामान्य दिनों में लोग चप्पू से चलने वाली नाव से आना-जाना करते हैं। बारिश के दिनों में पानी ज्यादा मात्रा में आने तथा तेज हवाओं के चलने के कारण इन लोगों का आना-जाना बंद हो जाता है। ऐसे में सभी परिवार वैक्सीन से वंचित थे।
कोरोना वॉरियर्स आशा सहयोगिनी कमला
कोरोना वॉरियर्स आशा सहयोगिनी कमला - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

कोरोना वॉरियर्स आशा सहयोगिनी 'कमला' की हिम्मत और जज्बे को सलाम। तेज हवाओं के बीच कमला, 45 मिनट तक खुद नाव चलाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम को टापू पर लेकर पहुंची। टापू पर बसे लोग वैक्सीन के लिए आगे नहीं आए तो, कमला स्वयं ही उनके घर पर पहुंच गई। करीब डेढ़ सौ लोगों का वैक्सीनेशन किया गया। नाविक की धैर्य परीक्षा क्या, जब धाराएं प्रतिकूल न हों, इन पंक्तियों को चरितार्थ कर दिखाया राजस्थान के सुदूर दक्षिण में स्थित डूंगरपुर जिले की कोरोना वारियर्स आशा सहयोगिनी कमला के जज्बे ने।

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डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा ब्लॉक के पीएचसी कोचरी के अन्तर्गत आने वाले 'सलाखड़ी' गांव क्षेत्र में ऐसा ही नजारा देखने को मिला है। वहां टापू पर रहने वाले लोग वैक्सीनेशन के लिए आगे नही आए। वहां मानसून की बरसात और जोरों से हवाएं चल रही थी। धैर्यवान नाविक आशा सहयोगिनी 'कमला' की हिम्मत की बदौलत स्वास्थ्य महकमे की टीम सुदूर टापूओं पर पहुंची। सीएमएचओ डॉ. राजेश शर्मा ने बताया, जिला कलेक्टर सुरेश कुमार ओला के नेतृत्व में जिले में पूरी सक्रियता के साथ टीकाकरण कार्य किया जा रहा है। वैक्सीनेशन के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने में जिला प्रशासन के जांबाज स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं कोरोना वॉरियर्स ने दो कदम आगे बढ़कर काम किया है।


उनके सामने चाहे कैसी भी चुनौती आई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गांव में घर-घर जाकर वैक्सीनेशन का कार्य पूरा किया है। ओड़ाफला एवं बेडाफला टापू पर रह रहे लोग चारों तरफ से करीब एक किलोमीटर चौड़ाई वाले क्षेत्र में पानी आने से वैक्सीनेशन सेंटर पर नहीं आ सके। ऐसे में आशा सहयोगिनी 'कमला' ने गजब का साहस एवं इच्छाशक्ति दिखाई। उन्होंने मेडिकल टीम को नाव में बैठाया और स्वयं उसकी खेवनहार बनकर तेज हवाओं के बीच गांव के लिए निकल पड़ीं। कमला 45 मिनट तक नाव चलाकर ओड़ाफला टापू पर बसे परिवारों के बीच पहुंची। इतनी मुसीबतें उठाने के बाद कमला को उस वक्त बहुत हैरानी हुई, जब कुछ लोगों ने वैक्सीनेशन के लिए मना कर दिया। अब यहां पर 'कमला' की दूसरी परीक्षा शुरू हुई, उन्होंने लोगों की काउंसलिंग की और वैक्सीन के फायदे बताए। आखिरकार लोगों ने उसकी बात मान ली। डॉ. राजेश शर्मा ने कहा, कोरोना वॉरियर्स की यह निष्ठा हम सभी को हौंसला देती है।

सीमलवाड़ा के बीसीएमओ डॉ. नरेंद्र प्रजापत ने बताया कि ओड़ाफला तथा बेडफला टापू पर कुल 32 मकानों में 137 लोग रहते हैं। दोनों टापू सालभर पानी से घिरे रहते हैं। सामान्य दिनों में लोग चप्पू से चलने वाली नाव से आना-जाना करते हैं। बारिश के दिनों में पानी ज्यादा मात्रा में आने तथा तेज हवाओं के चलने के कारण इन लोगों का आना-जाना बंद हो जाता है। ऐसे में सभी परिवार वैक्सीन से वंचित थे। दोनों टापूओं पर रह रहे लोगों तक पहुंचना और उनका वैक्सीनेशन करना, एक चुनौती पूर्ण कार्य था, जिसे हमारे कोरोना वॉरियर्स ने पूरी लगन और मेहनत के साथ पूरा किया है। प्रभारी अधिकारी डॉ. चन्द्रवीर परमार के अनुसार, ओड़ाफला टापू पर बसे परिवारों को वैक्सीन लगाने के लिए पहले दिन मेडिकल टीम गई। टीम के सदस्य नाव में बैठकर ओड़ाफला टापू की ओर चल दिये थे, लेकिन हवा ज्यादा तेज होने से नाव हिचकोले खाने लगी थी। नतीजा, टीम को वापस लौटना पड़ा।

ऐसे में दूसरे दिन टीम फिर से जाने के लिए तैयार हुई। तेज हवाओं के बीच नाव हिचकोले खाने लगी। टापू तक पहुंचना चुनौती भरा कार्य बन गया। ऐसे में आशा सहयोगिनी कमला ने कमाल की हिम्मत दिखाई। एक बारगी तो हवाएं तेज चलने से टीम के सदस्यों के दिल की धड़कने बढ़ गई थीं, लेकिन किसी ने भी हिम्मत नहीं हारी। सबसे ज्यादा हिम्मत का काम तो नाव चला रही कमला ने किया। उसने न तो खुद हिम्मत हारी और न ही दूसरे सदस्यों को हारने दिया। कमला ने लगभग पौन घंटे तक चप्पू से नाव चलाकर पूरी टीम  को टापू पर सुरक्षित पहुंचा दिया। वहां रहने वाले लोगों की भ्रांतियों को दूर कर उनका वैक्सीनेशन किया गया। जिला कलेक्टर सुरेश कुमार ओला ने कहा, डूंगरपुर जिले में दूर दराज के क्षेत्रों में और अथाह जल राशि के मध्य टापुओं पर बसे लोगों को वैक्सीनेशन करवाने के लिए कोरोना वारियर्स आशा सहयोगिनी कमला ने जो हिम्मत दिखाई है, वह उसकी कर्तव्य परायणता और काम के प्रति जज्बे को दर्शाता है।
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