सीमा पार से ड्रग्स तस्करी: 142 करोड़ का मामला, गिरोह ने बांग्लादेश बॉर्डर के पास पेड़ों पर लगा रखे थे 25 कैमरे
ईडी ने 142 करोड़ रुपये से अधिक के सीमा पार ड्रग्स तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में त्रिपुरा, मिजोरम व पश्चिम बंगाल में छापेमारी की। जांच में 25 सीसीटीवी कैमरों, फर्जी संस्थाओं, हवाला नेटवर्क और करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ।
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ईडी ने सीमा पार से मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े 142 करोड़ रुपये से अधिक के मामले में कई जगहों पर छापेमारी की है। अपराध से प्राप्त इस आय की 'मनी लॉन्ड्रिंग' के तहत जांच की जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आइजोल उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और मिजोरम के चार स्थानों पर तलाशी ली है। यह अभियान सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी के एक बड़े मामले से संबंधित चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में चलाया गया है। नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह ने बांग्लादेश बॉर्डर के निकट पेड़ों पर 25 सीसीटीवी कैमरे लगा रखे थे।
आठ लोगों की गिरफ्तारी
ईडी ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), अगरतला जोनल यूनिट द्वारा एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत केस संख्या 07/2025 में दर्ज किए गए मूल अपराध के आधार पर उक्त केस की जांच शुरू की है। एनसीबी का मामला 21.08.2025 को मिजोरम में एनएच-06ए पर वाहनों के काफिले को रोकने से संबंधित है, जिसके परिणामस्वरूप 49.101 किलोग्राम मेथम्फेटामाइन टैबलेट और 40 ग्राम हेरोइन जब्त की गई। आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया।
सीमावर्ती पतों एवं फर्जी संस्थाओं का उपयोग
ईडी द्वारा की गई जांच से एक संगठित अंतरराज्यीय और सीमा पार गिरोह का खुलासा हुआ है, जो म्यांमार स्थित आपूर्तिकर्ताओं से मेथम्फेटामाइन प्राप्त करता था। मिजोरम के चम्फाई/ज़ोखावथर क्षेत्र के माध्यम से इस प्रतिबंधित पदार्थ की भारत में तस्करी की जाती थी। बाद में इस पदार्थ को त्रिपुरा स्थित प्राप्तकर्ताओं तक पहुंचाता जाता था। इस प्रकार अर्जित अपराध की धनराशि को म्यांमार निवासी व्यक्तियों द्वारा सीमावर्ती पतों का उपयोग कर और फर्जी संस्थाओं के माध्यम से इस राशि का इस्तेमाल होता था। इस मामले में नकदी और हवाला चैनलों का उपयोग भी सामने आया है। यह इसलिए किया गया, ताकि धन के स्रोत और अंतिम लाभार्थियों को छिपाया जा सके।
142 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध क्रेडिट
जांच एजेंसी ने अब तक 142 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध क्रेडिट एकत्रित करने की पहचान की है। प्रतिबंधित पदार्थ के मुख्य म्यांमार स्थित आपूर्तिकर्ता, चिनतुआंग उर्फ तलुआंगा, और एक प्रमुख परिवहन सूत्रधार जब्रुल हक को एनसीबी ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। छापेमारी अभियान के दौरान गिरोह से जुड़े चार प्रमुख व्यक्तियों और संस्थाओं के आवासीय और कार्यालय परिसरों को शामिल किया गया है। इनमें अनवर हुसैन उर्फ सुमन मियां उर्फ करोड़पति सुमन और जसीम मियां (दोनों सोनमुरा, सेपाहिजाला, त्रिपुरा के निवासी) शामिल थे। इनकी पहचान जब्त खेप के अंतिम प्राप्तकर्ता के रूप में की गई थी।
इस महिला के खाते में 33 करोड़ की संदिग्ध जमा
हिंगथांसंगी (जोखावथर, मिजोरम) वह महिला है, जिनके बैंक खाते में 33 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध जमा राशि पाई गई थी। चैताली दास, मेसर्स रिजु एंटरप्राइजेज (उत्तर 24 परगना, पश्चिम बंगाल) की मालकिन, एक प्रोप्राइटरी फर्म जिस पर अपराध की आय को स्थानांतरित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने का संदेह था। तलाशी के दौरान पता चला है कि वहां 25 से अधिक सीसीटीवी कैमरे पेड़ों पर लगाए गए थे। ये कैमरे बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा की कांटेदार तार की बाड़ के साथ सुमन मियां और जसीम मियां के घरों के आसपास के वन क्षेत्रों को कवर करते थे।
सीआरपीएफ और बीएसएफ की मदद ली गई
ईडी ने तलाशी अभियान के दौरान प्रतिबंधित वस्तुओं को खोजने के लिए डॉग स्क्वाड का भी इस्तेमाल किया गया था। सुमन मियां और जसीम मियां के आवास भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित थे, जबकि जोखावथर स्थित स्थान म्यांमार सीमा से 500 मीटर से भी कम दूरी पर था। तलाशी के दौरान सीआरपीएफ और बीएसएफ की सहायता ली गई। तलाशी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और जांच से संबंधित अन्य भौतिक साक्ष्य बरामद कर जब्त किए गए हैं।