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CRPF: पुलवामा में आतंकियों की कमर तोड़ेगा बल, श्रीनगर के ट्रेनिंग सेंटर को लेथपोरा शिफ्ट करने के आदेश

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 26 Jul 2022 07:06 PM IST
सार

CRPF: सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने कहा था, श्रीनगर में सीआरपीएफ का ये तीस साल पुराना ट्रेनिंग सेंटर है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और सीआरपीएफ हेडक्वॉर्टर को अपने इस निर्णय पर दोबारा से विचार करना चाहिए। इस तरह का केंद्र तो मुख्य सड़क पर ही ठीक रहता है। लेथपोरा का सेंटर चार किलोमीटर अंदर है। वह आतंक प्रभावित क्षेत्र है...

CRPF जवान
CRPF जवान - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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विस्तार

श्रीनगर के हमहामा स्थित केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' भर्ती प्रशिक्षण केंद्र 'आरटीसी' को पुलवामा के लेथपोरा में शिफ्ट करने पर मुहर लग गई है। सीआरपीएफ मुख्यालय ने इस लेकर 25 जुलाई को आदेश जारी किए हैं। पुलवामा और उसके आसपास आतंकियों की भारी मौजूदगी बताई जाती है। अब वहां सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर शिफ्ट होने से आतंकियों की कमर तोड़ने में मदद मिलेगी। आतंकियों के इस गढ़ में अब सीआरपीएफ के नए रिक्रूट को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके अलावा श्रीनगर के रामबाग स्थित सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर भी 'हमहामा' में शिफ्ट होगा।

कम बजट में हो अदला-बदली

लेथपोरा स्थित आरटीसी में प्री-इंडक्शन ट्रेनिंग भी होगी। हालांकि कश्मीर में पहली बार जो बटालियन जाती है, उसे प्री-इंडक्शन ट्रेनिंग यहीं पर दी जाती है। ये प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। इसके अलावा बल की दूसरी अनिवार्य ट्रेनिंग, जो जिम्मेदारी का निर्वहन करने के लिए जरूरी हैं, वे भी यहां से संचालित होंगी। आरटीसी श्रीनगर का ऑपरेशनल कंट्रोल अब कश्मीर ऑपरेशनल सेक्टर के पास रहेगा। यहां की प्रशासनिक जरूरतें मुख्यालय के ट्रेनिंग सेक्टर द्वारा पूरी की जाएंगी। ग्रुप सेंटर अपनी प्रारंभिक जिम्मेदारी के अलावा श्रीनगर सेक्टर में आने वाली बटालियन को प्री-इंडक्शन ट्रेनिंग भी देगा। जब तक यह अस्थायी व्यवस्था रहेगी, तब तक श्रीनगर ग्रुप सेंटर के डीआईजी और आरटीसी-4 के डीआईजी अपनी अन्य जिम्मेदारियों के साथ-साथ एस्टेट अफसर की भूमिका भी निभाते रहेंगे। मुख्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि यह अदला-बदली कम से कम बजट में पूरी होनी चाहिए। यह नई व्यवस्था कश्मीर में हालात सुधरने तक जारी रहेगी।

बच्चों की स्कूली शिक्षा की टेंशन

इस अदला-बदली को लेकर बल के अफसरों के बीच टकराव के आसार बनते जा रहे थे। कुछ अफसरों का कहना था कि अभी तक ये ट्रेनिंग सेंटर एक महफूज इलाके में रहा है। वहां कोई आतंकी हमला भी नहीं हुआ, जबकि पुलवामा को आतंकियों का गढ़ माना जाता है। साल 2019 के दौरान पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। अब वहीं पर ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करना, किसी बड़े जोखिम से कम नहीं है। देश की दूसरी यूनिटों से जिन अधिकारियों या जवानों ने यह सोचकर श्रीनगर के इस सेंटर पर तबादला कराया था कि वहां तीन चार साल बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल जाएगी, अब उन्हें यह डर सता रहा है कि वे पुलवामा में कहां पर बच्चों को पढ़ाएंगे। लेथपोरा में न तो कोई बेहतर स्कूल है और न ही कोई मेडिकल सेंटर।

लेथपोरा में अभी सीआरपीएफ का जो सेंटर है, वहां कोई खास सुविधा नहीं है। वहां पर बल के उन जवानों की इंडक्शन ट्रेनिंग होती है, जिन्हें पहली बार कश्मीर में पोस्टिंग मिलती है। ये कोई रंगरूट नहीं होते, बल्कि फोर्स के अनुभवी जवान होते हैं। इनकी ट्रेनिंग महज डेढ़-दो माह की होती है। बल के पूर्व अधिकारी बताते हैं कि कम से कम ग्रुप सेंटर ऐसा तो हो जहां 5-6 यूनिटों के रहने एवं संसाधन मुहैया कराने की क्षमता हो। उसमें बल से संबंधित विभिन्न कार्यालयों के लिए पर्याप्त जगह हो। लेथपोरा सेंटर, इन मापदंडों पर खरा नहीं उतरता। वहां बल का कैंपस भी मुख्य सड़क से करीब तीन-चार किलोमीटर अंदर है। इसके लिए वहां हर समय आरओपी 'रोड ओपनिंग पार्टी' लगानी होगी। वह इलाका आतंकियों के प्रभाव वाला माना जाता है। वहां पर नए रिक्रूट को ट्रेनिंग देना जोखिम से भरा कदम होगा।

मुख्य सड़क से चार किमी अंदर है सेंटर

सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने कहा था, श्रीनगर में सीआरपीएफ का ये तीस साल पुराना ट्रेनिंग सेंटर है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और सीआरपीएफ हेडक्वॉर्टर को अपने इस निर्णय पर दोबारा से विचार करना चाहिए। इस तरह का केंद्र तो मुख्य सड़क पर ही ठीक रहता है। लेथपोरा का सेंटर चार किलोमीटर अंदर है। वह आतंक प्रभावित क्षेत्र है। सीएपीएफ के पूर्व अधिकारी चंद्राशेखरन ने कहा, बल में प्रशासनिक मुद्दों की टकराहट में ट्रेनिंग के साथ समझौता किया जाता है। इसका नतीजा भी उतना ही खराब रहता है। ट्रेनिंग सेंटर को शिफ्ट करना, अविवेक के साथ लिया गया और कल्पना से भरा निर्णय है। कॉन्फेडरेसन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियर्स वैलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारी रणबीर सिंह बताते हैं, इन सेंटर को लेथपोरा में ले जाने का हमारा संगठन विरोध करता है। आईपीएस अधिकारी कुछ दिनों के लिए आते हैं, लेकिन उनके गलत निर्णयों का खामियाजा, बल को भुगतना पड़ता है। श्रीनगर के सेंटर पर अभी तक दो सौ करोड़ से ज्यादा की धनराशि खर्च हो चुकी है।

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