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Bhupendra Yadav: पर्यावरण मंत्री बोले- प्रतिवर्ष 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद देने विफल रहे विकसित देश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 28 Sep 2022 08:28 PM IST
सार

साल 2009 में कोपेनहेगन में आयोजित यूएनएफसीसी के 15वें सम्मेलन (CoP15) में विकसित देशों ने प्रतिबद्धता जताई थी कि वह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में विकासशील देशों की मदद के लिए 2020 तक प्रतिवर्ष 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर मदद करेंगे। 

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र चौधरी
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र चौधरी - फोटो : ट्विटर / भूपेंद्र चौधरी
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विस्तार

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बुधवार को कहा कि विकासशील देशों की मदद के लिए विकसित देश 2020 तक प्रतिवर्ष 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने में विफल रहे हैं। जबकि 'ग्लासगो फाइनेंशियल अलायंस फॉर नेट जीरो' (जीएफएएनजेड) का अनुमान है कि नेट जीरो के लिए  2050 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था को 100 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होगी।


दुबई में वर्ल्ड ग्रीन इकोनॉमी समिट में एक मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेते हुए यादव ने कहा, ग्लासको फाइनेंशियल अलायंस फॉर नेट जीरो काअनुमान है कि 2050 तक ग्लोबल नेट जीरो के लिए 100 ट्रिलियन की जरूरत होगी। लेकिन विकसित देश 2020 तक प्रतिवर्ष 100 बिलियन डॉलर की राशि जुटाने में विफल रहे हैं। 


साल 2009 में कोपेनहेगन में आयोजित यूएनएफसीसी के 15वें सम्मेलन (CoP15) में विकसित देशों ने प्रतिबद्धता जताई थी कि वह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में विकासशील देशों की मदद के लिए 2020 तक प्रतिवर्ष 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर मदद करेंगे। 

यादव ने आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण और जलवायु उद्देश्यों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने में विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में तेजी लाना समय की जरूरत है। केंद्रीय मंत्री ने भारत सरकार की विभिन्न नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हासिल की गईं उपलब्धियों का भी जिक्र किया।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रीने इंटरनेशनल सोलर अलायंस जैसी वैश्विक पहलों, उर्जा, उद्योग, परिवहन, कृषि और वानिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में हरित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र किया। 

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