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EVM: 11 विपक्षी दलों ने ईवीएम के दुरुपयोग के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया, कहा- लोकतंत्र के लिए यह गंभीर चुनौती

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 13 Aug 2022 11:15 PM IST
सार

विपक्षी दलों की यहां हुई एक बैठक में तीन प्रस्ताव पारित किए गए। बैठक में 'भारत के चुनावी लोकतंत्र के समक्ष तीन एम (मशीन, मनी और मीडिया) की चुनौती' पर चर्चा और विमर्श किया गया और सर्वसम्मिति से उन पर प्रस्ताव पारित किया गया। 

विपक्षी दलों ने मशीन, मनी और मीडिया के खिलाफ लड़ाई का संकल्प लिया
विपक्षी दलों ने मशीन, मनी और मीडिया के खिलाफ लड़ाई का संकल्प लिया - फोटो : ट्विटर/ दिग्विजय सिंह
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विस्तार

कांग्रेस सहित ग्यारह विपक्षी दलों ने शनिवार को केंद्र की भाजपा सरकार पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, धन बल और मीडिया के 'दुरुपयोग' का आरोप लगाया और इसके खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया। विपक्षी दलों का कहना है कि यह भारत के लोकतंत्र के लिए 'सबसे गंभीर चुनौती' है।


इन 11 विपक्षी दलों में कांग्रेस के अलावा माकपा, सपा, बसपा, भाकपा, राकांपा, राजद, रालोद, तेलंगाना राष्ट्र  समिति (टीआरएस), वेलफेयर पार्टी और स्वराज इंडिया शामिल हैं।


विपक्षी दलों की यहां हुई एक बैठक में तीन प्रस्ताव पारित किए गए। बैठक में 'भारत के चुनावी लोकतंत्र के समक्ष तीन एम (मशीन, मनी और मीडिया) की चुनौती' पर चर्चा और विमर्श किया गया और सर्वसम्मिति से उन पर प्रस्ताव पारित किया गया। 

पहला प्रस्ताव ईवीएम और वीवीपीएटी की गिनती पर था। इसपर विपक्षी दलों ने कहा, "यह माना जाता है कि विशुद्ध रूप से ईवीएम आधारित मतदान और मतगणना 'लोकतंत्र के सिद्धांतों का पालन' नहीं करती है, क्योंकि इसके लिए प्रत्येक मतदाता को यह सत्यापित करने के लिए सक्षम होना पड़ेगा कि जैसा सोचा वैसा उसका वोट डाला गया है।"

उन्होंने दावा किया इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को टेम्पर-प्रूफ नहीं माना जा सकता है। उन्होंने कहा, मतदान प्रक्रिया स्वतंत्र होने के लिए सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर फिर से डिजाइन किए जाने चाहिए ताकि सत्यापन योग्य या ऑडिट योग्य हो। वीवीपीएटी प्रणाली फिर से डिजाइन किया जाना चाहिए। 

दूसरे प्रस्ताव में पार्टियों ने कहा कि भारी धनबल और उससे पैदा हुआ आपराधिक बाहुबल भारत के चुनावों की अखंडता को नष्ट कर रहा है। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों के खर्च की एक सीमा होती है लेकिन राजनीतिक दल के खर्च की कोई सीमा नहीं होती है। देश में तेजी से बढ़ रहा आर्थिक कुलीनतंत्र भारत को एक कल्याणकारी राज्य के रूप में खतरे में डाल रहा है, जो कि चनावों में इस अपराध और धन बल का प्रत्यक्ष परिणाम है, जो देश के सभी भ्रष्टाचार का स्त्रोत है। 

इन दलों ने दावा किया कि सरकार ने राज्यसभा को दरकिनार करने के लिए धन विधेयक मार्ग का उपयोग करके एक चुनावी बांड योजना की शुरुआत की, जिसने अपारदर्शिता को बढ़ाया है। चुनावी बांड योजना को उसके मौजूदा स्वरूप में तत्काल बंद किया जाना चाहिए। 

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