लोकप्रिय और ट्रेंडिंग टॉपिक्स

विज्ञापन
Hindi News ›   India News ›   Ex-CJI N V Ramana says Concerns on functioning Supreme Court collegium cannot be brushed aside

SC: पूर्व सीजेआई एनवी रमण ने कहा- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के कामकाज को लेकर चिंता को खारिज नहीं किया सकता

पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Sun, 02 Oct 2022 12:24 AM IST
सार

पूर्व सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कॉलेजियम प्रणाली को आवश्यक घोषित करते हुए कई फैसले पारित किए। उन्होंने आगे कहा कि न्यायपालिका इस प्रक्रिया में शामिल कई पक्षों में से एक है।

पूर्व चीफ जस्टिस एनवी रमण।
पूर्व चीफ जस्टिस एनवी रमण। - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
ख़बर सुनें

विस्तार

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमण ने शनिवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम प्रणाली के कामकाज से संबंधित सरकार सहित विभिन्न हलकों में उठाई गई चिंताओं को नजरअंदाज या खारिज नहीं किया जा सकता है।



पूर्व सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कॉलेजियम प्रणाली को आवश्यक घोषित करते हुए कई फैसले पारित किए। उन्होंने आगे कहा कि न्यायपालिका इस प्रक्रिया में शामिल कई पक्षों में से एक है। न्यायमूर्ति रमण ने यह भी कहा कि न्यायपालिका में पीठ पर विविधता सुनिश्चित करने के लिए एक संस्थागत तंत्र का अभाव एक समस्या है।


न्यायमूर्ति रमण एशियन ऑस्ट्रेलियन लॉयर्स एसोसिएशन इंक के राष्ट्रीय सांस्कृतिक विविधता शिखर सम्मेलन को "सांस्कृतिक विविधता और कानूनी पेशे" विषय पर ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे। पूर्व सीजेआई ने कहा कि इनमें कई प्राधिकरण शामिल हैं, जिनमें राज्य या केंद्र सरकार, जैसा भी मामला हो। भारत में कॉलेजियम प्रणाली के कामकाज से संबंधित सरकार, वकीलों के समूहों और नागरिक समाज सहित विभिन्न हलको में कई चिंताओं को उठाया गया है। इन्हें नजरअंदाज या अलग नहीं किया जा सकता है, और निश्चित रूप से यह विचार करने योग्य है।

उन्होंने कहा कि पिछले महीने कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने सुझाव दिया था कि उच्च न्यायपालिका में नियुक्ति की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कॉलेजियम प्रणाली पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि मौजूदा प्रक्रिया के बारे में चिंताएं हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यवस्था मौजूद है वह परेशानी पैदा कर रही है और हर कोई इसे जानता है।

एनडीए सरकार ने 2014 में जजों की नियुक्ति की व्यवस्था को बदलने की कोशिश की थी। 2014 में लाया गया राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) अधिनियम, उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति में कार्यपालिका को एक प्रमुख भूमिका प्रदान करता। लेकिन 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। रमण ने कहा कि बेंच पर विविधता विचारों की विविधता की ओर ले जाती है, जो दुनिया में उनके अलग-अलग अनुभवों पर आधारित हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति 'कॉलेजियम प्रणाली' के माध्यम से होती है, जिसमें शीर्ष अदालत के पांच वरिष्ठतम न्यायाधीशों को यह तय करने की पूरी शक्ति होती है कि न्यायपालिका में किसे नियुक्त किया जाना चाहिए।
विज्ञापन

पूर्व सीजेआई ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में विविध पृष्ठभूमि के न्यायाधीशों की नियुक्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि "भारत के प्रधान न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, मैंने अपनी सिफारिशों के माध्यम से पीठ में विविधतापूर्ण प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की कोशिश की। हमारे द्वारा की गई लगभग सभी सिफारिशें भारत सरकार ने मंजूर की थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं गर्व से कह सकता हूं कि हमारी सिफारिशों के परिणामस्वरूप भारत के सर्वोच्च न्यायालय में अब तक सबसे बड़ी संख्या में महिला न्यायाधीशों की नियुक्ति हुई है। भारत को पहली महिला प्रधान न्यायाधीश मिलने की भी संभावना है।"

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
एप में पढ़ें
जानिए अपना दैनिक राशिफल बेहतर अनुभव के साथ सिर्फ अमर उजाला एप पर
अभी नहीं

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00