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Heal in India: विदेशी मरीजों को भी इलाज में न हो मुश्किल, पीएम मोदी 15 अगस्त को कर सकते हैं नई योजना का एलान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sun, 07 Aug 2022 07:48 PM IST
सार

सरकार ने अब तक 44 ऐसे देशों की पहचान कर ली है, जहां से बड़ी संख्या में लोग चिकित्सा जरूरतों के लिए भारत आते हैं। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि इन देशों में इलाज के खर्चे और गुणवत्ता पर भी विचार किया गया है। इनमें अधिकतर अफ्रीका, लातिन अमेरिका, सार्क (SAARC) और खाड़ी देश हैं। 

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी का भाषण
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी का भाषण - फोटो : ANI (फाइल फोटो)
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विस्तार

विदेश से भारत आकर इलाज कराने वाले मरीजों को अतिरिक्त सुविधा मुहैया कराने और भारत की चिकित्सा व्यवस्था की खूबियों को दुनियाभर में प्रचारित करने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही नई योजना लाने जा रही है। हील इन इंडिया (Heal In India) नाम की इस योजना का एलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस 15 अगस्त को लाल किले से संबोधन के दौरान कर सकते हैं। बताया गया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस योजना को अंतिम रूप देने पर काम शुरू कर दिया है। 


क्या है सरकार की हील इन इंडिया योजना?
इस योजना के तहत सरकार देश के 10 बड़े एयरपोर्ट्स पर इंटरप्रेटर्स और विशेष डेस्क स्थापित करेगी, जो कि विदेश से भारत में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की मदद करेगा। इसके अलावा विदेशी मरीजों के बीच भारत में इलाज की आसान व्यवस्था को प्रचारित करने के लिए एक बहुभाषी पोर्टल और आसान वीजा नियम भी बनाए जाएंगे। सरकार इस योजना के जरिए मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने की कोशिश में है। 


सरकार ने अब तक 44 ऐसे देशों की पहचान कर ली है, जहां से बड़ी संख्या में लोग चिकित्सा जरूरतों के लिए भारत आते हैं। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि इन देशों में इलाज के खर्चे और गुणवत्ता पर भी विचार किया गया है। इनमें अधिकतर अफ्रीका, लातिन अमेरिका, सार्क (SAARC) और खाड़ी देश हैं। 

किन 10 एयरपोर्ट्स पर सुविधा मुहैया कराएगी सरकार?
सरकार ने विदेश से आने वाले मरीजों को सुविधा देने के लिए जिन 10 एयरपोर्ट्स की पहचान की है, उनमें- दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता, विशाखापत्तनम, कोच्ची, अहमदाबाद, हैदराबाद और गुवाहाटी शामिल हैं। इन एयरपोर्ट्स पर 44 देशों के लोग सबसे ज्यादा आते हैं।

सूत्रों में से एक ने बताया, ‘‘चिकित्सा यात्रा को बढ़ावा देने और मरीजों की यात्रा में सुविध देने के लिए, सरकार भाषा बहुभाषियों को तैनात करेगी और चिकित्सा यात्रा, परिवहन, बोर्डिंग से जुड़े सवालों के लिए 10 चिन्हित हवाई अड्डों पर स्वास्थ्य डेस्क स्थापित करेगी।’’ एक अधिकारी ने बताया कि अनुमान के मुताबिक, चिकित्सा पर्यटन बाजार, जिसका मूल्य 2020 के वित्तीय वर्ष में छह अरब अमेरिकी डॉलर था, के दोगुने से अधिक और 2026 तक 13 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

12 राज्यों में बुनियादी व्यवस्था भी तैयार
स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सहयोग से एक बहुभाषी पोर्टल विकसित किया है जो विदेशी मरीजों के लिए विभिन्न सेवाओं के लिए ‘वन-स्टॉप शॉप’ होगी। पोर्टल की 15 अगस्त को शुरुआत होने की भी संभावना है। मंत्रालय ने 12 राज्यों-दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और असम के 17 शहरों में 37 अस्पतालों में बुनियादी ढांचे को बढ़ाने की योजना भी तैयार की है। सरकार चिन्हित किए गए 44 देशों के मरीजों और उनके साथियों के लिए मेडिकल वीजा नियमों को आसान बनाने पर भी काम कर रही है।

स्वास्थ्य मंत्रालय पर्यटन, आयुष, नागरिक उड्डयन मंत्रालयों, विदेश मंत्रालय, अस्पतालों और अन्य हितधारकों के साथ सहयोग कर रहा है ताकि चिकित्सा यात्रा को बढ़ावा देने के लिए भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ विदेशी मरीजों को जोड़ने के लिए एक रूपरेखा तैयार की जा सके। स्वास्थ्य सेवा उद्योग के लिए भारत की क्षमता को रेखांकित करते हुए आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि भारत में इलाज की लागत ज्यादातर देशों की तुलना में दो से तीन गुना कम है। भारत में इलाज अमेरिका के मुकाबले 65 से 90 फीसदी सस्ता है। इसके अलावा, भारत आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी चिकित्सा प्रदान करता है।

बांग्लादेश, इराक, मालदीव, अफगानिस्तान, ओमान, यमन, सूडान, केन्या, नाइजीरिया और तंजानिया से भारत आने वाले कुल अंतरराष्ट्रीय रोगियों का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा है। अकेले बांग्लादेश में कुल चिकित्सा पर्यटकों का 54 प्रतिशत हिस्सा है। भारत में विदेशी मरीजों द्वारा हृदय रोगों, मधुमेह और गुर्दे की बीमारियों के उपचार की सबसे अधिक मांग रहती है।

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