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दिल्ली: चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के 100 साल पूरे होने पर जश्न, लेफ्ट फ्रंट और डीएमके के नेता हुए शामिल

एएनआई, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Thu, 29 Jul 2021 11:03 PM IST
सार

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के 100 साल पूरे होने के मौके पर दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में लेफ्ट और डीएमके के कुछ सांसदों ने हिस्सा लिया। ये लोग दिल्ली में स्थित चीनी दूतावास में पहुंचे थे, जहां चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के 100 साल पूरे होने के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

कम्युनिस्ट पार्टी के 100 साल पूरे होने के जश्न में शामिल हुए लेफ्ट फ्रंट और डीएमके के नेता
कम्युनिस्ट पार्टी के 100 साल पूरे होने के जश्न में शामिल हुए लेफ्ट फ्रंट और डीएमके के नेता - फोटो : ANI
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विस्तार

चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के 100 साल पूरे होने पर जश्न मनाया जा रहा है। लंबे वक्त से भारत और चीन के रिश्तों में तनातनी जारी है। इस बीच, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के 100 साल पूरे होने के मौके पर दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में लेफ्ट और डीएमके के कुछ सांसदों ने हिस्सा लिया। ये लोग दिल्ली में स्थित चीनी दूतावास में पहुंचे थे, जहां चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के 100 साल पूरे होने के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।


 
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के 100 साल पूरे होने के जश्न में सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी, सीपीआई के जनरल सेक्रेटरी डी राजा, लोकसभा सांसद डॉ. एस. सेंथिलकुमार शामिल हुए थे। इसके अलावा ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के जी. देवराजन पहुंचे थे।


नई दिल्ली स्थित चीन के दूतावास में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान चीन राजदूत ने भारत-चीन रिश्तों पर भी अपनी बात रखी। चीन राजदूत सुन वीडांग ने गलवान घाटी का जिक्र करते हुए कहा, ''चीन ने तमाम मौकों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के साथ-साथ दुनिया में शांति और समृद्धि के लिए भारत और चीन के संबंध बहुत मायने रखते हैं। हमें अपने द्विपक्षीय रिश्तों को और अधिक तर्कपूर्ण और लंबे समय के हिसाब से लेकर चलना होगा। सुन वीडांग ने कहा कि भारत और चीन दुश्मन या प्रतिद्वंदी नहीं हैं, बल्कि साझेदार हैं। 

उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे की सफलता का पर्याय बनना चाहिए, न कि रास्ते की बाधा। हमें एक-दूसरे की रणनीति को सही नजरिए से देखने की जरूरत है। इसी तरह से क्षेत्रीय संप्रभुता और आंतरिक मामलों में भी आपसी समझदारी दिखाने की जरूरत है। 

भाजपा और वाम नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप
वहीं, इस कार्यक्रम में वामपंथी नेताओं की मौजूदगी को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि वाम दलों की परंपरा रही है कि राष्ट्रीय हितों का विरोध किया जाए और बाहरी शक्तियों के साथ वफादार रहा जाए। वहीं, वाम दलों ने कहा कि केंद्र सरकार खुद कई मुद्दों को लेकर चीन के साथ संपर्क में है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह ये मुद्दे इसलिए उठा रही है क्योंकि वह सरकार की विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाना चाहती है।
 

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