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Karnataka: विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार का बड़ा फैसला, CM बोम्मई ने की एससी-एसटी कोटा बढ़ाने की घोषणा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 07 Oct 2022 07:39 PM IST
सार

मुख्यमंत्री ने कहा, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों की आबादी के आधार पर लंबे समय से आरक्षण की मांग रही है। न्यायमूर्ति नागमोहन दास आयोग की सिफारिशों पर आज सर्वदलीय बैठक में चर्चा की गई और इसे मंजूरी दे दी गई। 

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कर्नाटक केबिनेट ने शनिवार को सर्वसम्मित से राज्य में अनुसूचित जातियों (एससी) के लिए आरक्षण 15 फीसदी से बढ़ाकर 17 फीसदी और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए 3 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी करने पर सहमति व्यक्त की। राज्य सरकार इस संबंध में एक गजट अधिसूचना जारी करेगी। 



मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा, राज्य सरकार अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के वंचित समुदायों के लिए आंतरिक आरक्षण प्रदान करने के लिए न्यायमूर्ति सदाशिव आयोग की रिपोर्ट की समीक्षा करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए एक अलग निगम बनाने का निर्णय लिया गया है। 


इससे पहले कर्नाटक की भाजपा सरकार ने शुक्रवार को संवैधानिक संशोधन के जरिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का आरक्षण बढ़ाने का फैसला किया। मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा की थी।  

राज्य सरकार ने यह फैसला न्यायमूर्ति एच. एन. नागमोहन दास आयोग की रिपोर्ट के आधार पर लिया है। इस आयोग ने एससी आरक्षण 15 फीसदी से बढ़ाकर 17 फीसदी करने की सिफारिश की थी, इसके अलावा एसटी आरक्षण को 3 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी करने की सिफारिश की थी। आयोग ने जुलाई 2020 में सरकार को अपनी सिफारिशें दीं थीं। 

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने शुक्रवार को एक सर्वदलीय बैठक के बाद इसकी घोषणा की थी। इस बैठक में कांग्रेस और जनता दल (एस) के नेता भी पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने कहा था, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों की आबादी के आधार पर लंबे समय से आरक्षण की मांग रही है। न्यायमूर्ति नागमोहन दास आयोग की सिफारिशों पर आज सर्वदलीय बैठक में चर्चा की गई और इसे मंजूरी दे दी गई। 

बोम्मई ने कहा था, इससे पहले हमारी पार्टी के भीतर भी इस पर चर्चा हुई। पार्टी ने भी एससी/एसटी के कल्याण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखने के लिए फैसला लिया। उन्होंने यह भी बताया कि शनिवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई जाएगी, जहां इसको लेकर औपचारिक फैसला लिया जाएगा। 
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बताया जाता है कि बोम्मई सरकार पर आयोग की रिपोर्ट को लागू करने को लेकर एससी-एसटी सांसदों का काफी दबाव था। इसके अलावा, वाल्मीकि गुरुपीठ के आचार्य प्रसन्नानंद स्वामी भी इस कोटे को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं और लंबे समय से भूख हड़ताल पर हैं। वहीं दूसरी ओर इस कोटे को बढ़ाने को लेकर देरी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस लगातार सरकार पर हमलावर रही है। 

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