कुरुक्षेत्र: प्रियंका को चेहरा बनाने और महिला सशक्तिकरण से हिंदुत्व और जातीय ध्रुवीकरण के काट की तैयारी

Vinod Agnihotri विनोद अग्निहोत्री
Updated Tue, 19 Oct 2021 05:39 PM IST

सार

कांग्रेस नेताओं को उम्मीद है कि प्रियंका के चेहरे के साथ कांग्रेस जब विधानसभा चुनावों में चालीस फीसदी महिला उम्मीदवारों के साथ मैदान में उतरेगी, तो निश्चित रूप से जाति धर्म और वर्ग की सीमाओं से उठकर महिलाओं का समर्थन उसे मिल सकता है। अगर ऐसा हुआ तो कांग्रेस की सीटें भी बढ़ेंगी और मत प्रतिशत भी...
यूपी चुनाव 2022 पर प्रियंका गांधी प्रेस कॉन्फ्रेंस
यूपी चुनाव 2022 पर प्रियंका गांधी प्रेस कॉन्फ्रेंस - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की ओर से चालीस फीसदी सीटों पर महिलाओं को टिकट देने की प्रियंका गांधी की घोषणा ने न सिर्फ विधानसभा चुनावों बल्कि 2024 तक होने वाले सभी विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव के लिए भी कांग्रेस का सियासी एजेंडा तय कर दिया है। प्रियंका की इस घोषणा से तीन बातें साफ हैं।
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पहली ये कि जब विधानसभा चुनाव में महिला सशक्तिकरण कांग्रेस का मुख्य मुद्दा होगा तो पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा भी कोई महिला ही हो सकती है, क्योंकि बसपा प्रमुख मायावती खुद को महिला मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के रूप में पेश करेंगी और ऐसा होने पर कांग्रेस के सामने किसी महिला को आगे करने की सियासी मजबूरी होगी। क्योंकि प्रियंका गांधी से बड़ा कोई दूसरा नाम कांग्रेस में नहीं है, इसलिए इसकी संभावना भी है कि अगर यह मुद्दा महिलाओं में आकर्षण पैदा करने में कामयाब हुआ तो देर-सवेर प्रियंका गांधी को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने की घोषणा पार्टी कर सकती है या फिर उन्हें विधानसभा का चुनाव लड़ाकर यह संदेश दे सकती है।


प्रियंका की आज की घोषणा से दूसरा संकेत यह है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जहां भाजपा सपा और बसपा का फोकस सामाजिक समीकरण साधने पर है, वहीं प्रियंका की अगुआई में कांग्रेस ने महिला कार्ड चलकर चुनाव का फोकस बदल दिया है और कांग्रेस का सारा जोर प्रदेश की आधी आबादी को अपने साथ जोड़कर देश के सबसे बड़े सूबे में अपनी लिए नई संभावनाएं तलाशने पर होगा। इस तरह कांग्रेस भाजपा के हिंदू ध्रुवीकरण और सपा बसपा के जातीय ध्रुवीकरण के कार्ड को महिला सशक्तिकरण के दांव से तोड़ेगी।

तीसरी बात ये कि अगर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को इस मुद्दे का फायदा मिला तो न सिर्फ 2022 और 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों में बल्कि 2024 के लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस महिला सशक्तिकरण और महिला सुरक्षा के मुद्दे को प्रमुख चुनावी मुद्दा बना सकती है। मुमकिन है इसके लिए कांग्रेस यूपीए सरकार द्वारा राज्यसभा में पारित किए गए महिला आरक्षण विधेयक को लोकसभा में लाकर पारित कराने के लिए भी दबाव बनाकर उसे मुद्दा बनाए।

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