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महाराष्ट्र: बाढ़-भूस्खलन से छह जिलों में तबाही, अब तक 209 की मौत

अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: देव कश्यप Updated Wed, 28 Jul 2021 04:30 AM IST

सार

  • 8 लापता, एनडीआरएफ की 18 और सेना की तीन टीमें राहत एवं बचाव में लगीं
बारिश से बेहाल मुंबई
बारिश से बेहाल मुंबई - फोटो : PTI
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विस्तार

महाराष्ट्र में भीषण बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन से छह जिलों में भारी तबाही हुई है। राज्य के राहत व पुनर्वास मंत्री विजय वडेट्टीवार ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, बाढ़ और भूस्खलन से हुए हादसों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 209 हो गई है, जबकि आठ लोग लापता हैं। प्रभावित इलाकों में एनडीआरएफ की 18 और सेना की तीन टीमें राहत व बचाव कार्यों में लगी हुई हैं।

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मंत्री ने कहा कि गाडगिल समिति ने कोंकण क्षेत्र को इको सेंसिटिव क्षेत्र घोषित किया है। यदि यहां के प्राकृतिक वैभव के साथ छेड़छाड़ की जाएगी तो इसी तरह की आपदा से जूझना पड़ेगा। राज्य में छह जिलों में बाढ़ और भूस्खलन से जानमाल के भारी नुकसान हुआ है।


प्रभावित लोगों को स्थायी रूप से मदद का विचार किया जा रहा है। वहीं, अधिकारिक सूत्रों ने कहा कि प्रभावित इलाकों में राहत के लिए छह हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता है। फिलहाल, राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भी मंगलवार को कोंकण के प्रभावित इलाकों का दौरा किया और हालात का जायजा लिया।

प्रभावित कोंकण में मुंबई भाजपा ने भेजी चार ट्रक राहत सामग्री
कोंकण के रायगढ़ और रत्नागिरी जिले में बाढ़ और भूस्खलन से हुई तबाही में संकटग्रस्त लोगों के लिए मंगलवार को मुंबई भाजपा युवा मोर्चा की तरफ से चार ट्रक राहत सामग्री रवाना की गई। विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस और मुंबई भाजपा अध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा ने हरी झंडी दिखाकर चार ट्रकों को कोंकण के लिए रवाना किया। वहीं, मुंबई भाजपा के 83 पार्षदों ने एक महीने का वेतन बाढ़ और भूस्खलन प्रभावितों को देने की घोषणा की है।

वीआईपी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाने से बचें: शरद पवार
एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने कहा, राष्ट्रवादी कल्याण ट्रस्ट की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में बर्तनों के 16 हजार किट बांटे जाएंगे। उन्होंने कहा, ढाई करोड़ रुपये की लागत से यह किट 16 हजार परिवारों को दिए जाएंगे। शरद पवार ने कहा कि, वीआईपी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे से बचें। ऐसे क्षेत्रों में वीआईपी दौरे बचाव और राहत कार्यों को प्रभावित करते हैं।

पवार ने कहा है कि महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में नदियों के बाढ़ क्षेत्र में निर्माण हुआ है। इससे राज्य में बाढ़ का खतरा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि इस बारे में सरकार को नीतिगत निर्णय लेना होगा। 

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