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समीकरण: मोदी मंत्रिमंडल विस्तार से सधेगा यूपी चुनाव, दलित चेहरे सहित ये चार बड़े नाम होंगे शामिल

अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Tue, 06 Jul 2021 02:42 PM IST
सार

केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में उत्तर प्रदेश के चुनाव सहित देश के अन्य राज्यों के समीकरणों को भी साधने की कोशिश।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व योगी आदित्यनाथ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

केंद्रीय मंत्रिमंडल का बहुप्रतीक्षित विस्तार गुरुवार को हो सकता है। इसमें 20 से अधिक नए मंत्रियों को अवसर मिल सकता है तो लगभग 10 मंत्रियों के कामकाज में बदलाव हो सकता है। मंत्रिमंडल विस्तार से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को भी साधने की कोशिश की जाएगी। इसके अंतर्गत एक बड़े दलित चेहरे को कैबिनेट मंत्री के रूप में जगह दी जा सकती है तो वहीं छोटे दलों की केंद्रीय मंत्रिमंडल में सहभागिता बढ़ाकर सभी वर्गों को संतुष्ट करने की कोशिश की जा सकती है।



भाजपा के एक केंद्रीय नेता ने अमर उजाला को बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार शीघ्र हो सकता है। इसमें दलित वर्ग की भूमिका बढ़ाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि उत्तर प्रदेश में दलित वर्ग का कोई सर्वमान्य बड़ा नेता नहीं रह गया है।


पार्टी मानती है कि बसपा नेता मायावती अब दलितों की एकछत्र नेता नहीं रह गई हैं। विकल्पहीनता के अभाव में दलित समाज एक बड़े नेतृत्व की आस लगाए बैठा है। पार्टी दलित समाज से एक बड़ा नेता उभारकर दलित वर्ग को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर सकती है। संभावना है कि एक ब्राह्मण नेता को भी उत्तर प्रदेश से केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इससे पार्टी से नाराज चल रहे ब्राह्मण वोट बैंक को पार्टी के साथ लाने की कोशिश हो सकती है। 

रामविलास पासवान के देहावसान और थावरचंद गहलोत को कर्नाटक का राज्यपाल बना दिए जाने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में दलित वर्ग की भागीदारी कमजोर हुई है। पार्टी इसे पूरा करने की कोशिश करेगी। माना जा रहा है कि इस कोटे में रामशंकर कठेरिया की किस्मत खुल सकती है जो आगरा से आते हैं। दलित वर्ग की बड़ी आबादी के कारण आगरा को दलित राजनीति की राजधानी कहा जाता है।

इसी के साथ लोक जनशक्ति पार्टी नेता और हाजीपुर से सांसद पशुपति कुमार पारस को भी मंत्रिमंडल में शामिल कर दलित भागीदारी को बैलेंस करने की कोशिश की जाएगी। पार्टी का मानना है कि इससे यूपी के साथ-साथ बिहार में भी एक अच्छा संकेत जाएगा।

वरुण गांधी पर भी चर्चा

गांधी परिवार के बड़े नाम वरुण गांधी को मंत्री बनाए जाने को लेकर भी अटकलों का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर यूपी के आंवला और पीलीभीत क्षेत्र में एक बड़ा संदेश देना चाहती है। उनके आने से पार्टी में युवा नेतृत्व के साथ-साथ एक दमदार चेहरा भी मिल सकता है।

क्षेत्रीय दलों को भी साधेगी पार्टी
उत्तर प्रदेश से अपना दल (एस) नेता अनुप्रिया पटेल को मंत्रिमंडल में शामिल कर पिछड़े वर्ग की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है तो निषाद पार्टी के नेता संजय निषाद के सांसद बेटे प्रवीण निषाद को भी मंत्रिमंडल में शामिल करने की अटकलें लगाई जा रही हैं।

मध्यप्रदेश और बिहार का बढ़ेगा दम
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया का केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने तय माना जा रहा है। इसे उनकी मध्यप्रदेश में सरकार बनाने के प्रयास के इनाम के तौर पर भी देखा जा रहा है। उन्हें पार्टी की तरफ से दिल्ली पहुंचने के लिए कहा गया है। उनका देवास का दौरा स्थगित कर दिल्ली आने को मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे मंत्रिमंडल में मध्यप्रदेश की भागीदारी संतुलित रखने की कोशिश होगी क्योंकि थावरचंद गहलोत के जाने से यह कड़ी कमजोर पड़ रही थी।

बिहार से जनता दल यूनाइटेड को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर उसकी भूमिका भी बढ़ाई जा सकती है। इस दल के राज्यसभा में नेता रामचंद्र प्रसाद सिंह को मंत्री बनाया जा सकता है तो बिहार से भाजपा नेता सुशील मोदी को मंत्रिमंडल में जगह देकर उन्हें भी संतुष्ट किया जा सकता है।

महाराष्ट्र के मराठों को भी साधेगी पार्टी

जिस तरह से महाराष्ट्र के नेता नारायण राणे को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के कहने पर दिल्ली बुलाया गया है, माना जा रहा है कि उनका मंत्रिमंडल में शामिल होना तय है। इससे पार्टी महाराष्ट्र की केंद्रीय मंत्रिमंडल में भागीदारी बढ़ाना चाहती है क्योंकि शिवसेना के उससे अलग होने के बाद यह भागीदारी कमजोर हो गई है।

कमजोर प्रदर्शन वाले नेताओं की छुट्टी
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, लगभग 10 मंत्रियों के विभागों में परिवर्तन किया जा सकता है और इतने को ही मंत्रिमंडल से हटाकर संगठन में वापस लाया जा सकता है। इसके साथ ही जिन मंत्रियों के पास काम का भार ज्यादा है, उनके ऊपर से भार कम करके उन्हें अन्य ऊर्जावान मंत्रियों को दिया जा सकता है जिससे मंत्रियों के कामकाज में सुधार हो।

इस कड़ी में कई विभाग संभाल रहे केंद्रीय कानून और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और पीयूष गोयल के कुछ विभागों में फेरबदल किया जा सकता है। इसी प्रकार हरदीप सिंह पुरी के कामकाज में बदलाव की भी अटकलें लगाई जा रही हैं।
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