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TMC: ‘अमित शाह के बुलावे पर नैतिकता खत्म हो जाती है’ सागरिका घोष पाला बदलने वाले बागी नेताओं पर बरसीं
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: Asmita Tripathi
Updated Tue, 09 Jun 2026 11:20 AM IST
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सार
तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने चुनावी हार के बाद दल बदलने वाले नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने इसे नैतिकता का संकट बताया। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया। पढ़ें पूरी खबर
तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने चुनावी हार के बाद दल बदलने वाले नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने इसे नैतिकता का संकट बताया। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया। पढ़ें पूरी खबर
सागरिका घोष
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने मंगलवार को चुनाव परिणामों के बाद पाला बदलने वाले राजनेताओं पर तीखा हमला किया। उन्होंने उनकी नैतिकता पर सवाल उठाया और राजनीतिक दलबदल की संस्कृति को शर्मनाक बताया।
लोकतांत्रिक ढांचे को नष्ट करने का आरोप
घोष ने एक्स पोस्ट पर लिखा, '2024 में मेरे लिए व्यक्तिगत ही राजनीतिक मुद्दा बन गया। मैंने सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया क्योंकि मेरा दृढ़ विश्वास है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा भारत के बहुमूल्य लोकतांत्रिक मूल्यों को नष्ट कर रही है। मैं विपक्ष के संवैधानिक संघर्ष में विश्वास करती थी और करती हूं, जो कि संविधान विरोधी, सांप्रदायिक मानसिकता वाली मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा के खिलाफ है, जो धार्मिक युद्धों को भड़काने पर तुली हुई है।
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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी में अपनी आस्था को दोहराते हुए उन्होंने कहा, 'मैं ममता बनर्जी के नेतृत्व में विश्वास करती थी, करती हूं और हमेशा करती रहूंगी। वह अपने अटूट साहस और मूल्य-आधारित राजनीति में सभी महिलाओं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए प्रेरणा हैं।'
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पार्टी के हार पर पाला बदल लेते हैं
टीएमसी नेता ने चुनावी हार का सामना करते ही नेताओं की ओर से अपनी पार्टियों को छोड़ने की प्रवृत्ति पर अविश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'मुझे जो बात अजीब लगती है। वह यह संस्कृति है कि एक पार्टी के चिन्ह और एक नेता के नाम पर चुनाव जीतते हैं और फिर हार का सामना होते ही उस पार्टी और नेता को छोड़ देते हैं। अगर चुनाव परिणाम के साथ आपके विश्वास बदल जाते हैं, तो क्या वह वास्तव में विश्वास थे? आप एक पार्टी के चिन्ह पर चुनाव लड़ते हैं। आप मतदाताओं से पार्टी के घोषणापत्र पर भरोसा करने को कहते हैं। आप उस पार्टी के समर्थन और नेता की लोकप्रियता के कारण जीतते हैं। फिर पार्टी हार जाती है, और आप तुरंत पाला बदल लेते हैं।'
'जनादेश आखिर किस लिए था?'
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाना बनाते हुए घोष ने ऐसे नेताओं के जनादेश पर सवाल उठाया और सुझाव दिया कि भाजपा नेतृत्व के एक फोन कॉल से ही नैतिकता समाप्त हो जाती है। टीएमसी नेता ने आगे कहा 'अगर वफादारी सिर्फ जीत तक ही रहती है, तो जनादेश आखिर किस लिए था? या फिर जब अमित शाह और उनके साथी फोन करते हैं, तो आप आज्ञाकारी होकर कतार में खड़े हो जाते हैं, और सारी नैतिकता खत्म हो जाती है? शर्मनाक।'
क्या है मामला?
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लगभग 20 सांसदों ने औपचारिक रूप से अपनी पार्टी की वर्तमान राजनीतिक दिशा से अलग होने और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ जुड़ने की इच्छा का संकेत दिया है। टीएमसी की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सोमवार को एएनआई के एक रिपोर्टर को 'थम्ब्स अप' इमोजी के साथ इस घटनाक्रम की पुष्टि की।
दस्तीदार ने कहा, 'टीएमसी के कुल 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को औपचारिक रूप से पत्र लिखकर एनडीए को समर्थन देने की इच्छा व्यक्त की है, जो पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य और राष्ट्रीय संसदीय गतिशीलता में संभावित बदलाव का संकेत है।' पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद पार्टी में बढ़ते आंतरिक संकट के बीच यह घटनाक्रम सामने आया है। इन चुनावों में राज्य ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पहली बार भाजपा सरकार का गठन किया।