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AIADMK Rift: पन्नीरसेल्वम ने बढ़ाया दोस्ती का हाथ, पलानीस्वामी ने ठुकराया, लगाया ये आरोप

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: Amit Mandal Updated Thu, 18 Aug 2022 09:25 PM IST
सार

पलानीस्वामी ने बुधवार को एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसने 11 जुलाई के एआईएडीएमके जनरल काउंसिल के प्रस्तावों को मान्य नहीं घोषित किया था। 

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AIADMK - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

अन्नाद्रमुक नेता ओ पनीरसेल्वम ने गुरुवार को अपने प्रतिद्वंद्वी एडप्पादी के पलानीस्वामी (ईपीएस) को संयुक्त रूप से पार्टी चलाने के लिए मतभेद खत्म कर दोस्ती की पेशकश की और कहा कि जो बीत गया उसे जाने दें। लेकिन पलानीस्वामी ने ओपीएस के साथ किसी भी तरह के संबंध से इनकार कर दिया और कहा कि उनकी वजह से ही 2021 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को करारी हार मिली थी। संयोग से पन्नीरसेल्वम का एकता का आह्वान अपदस्थ अन्नाद्रमुक नेता वीके शशिकला और उनके भतीजे टीटीवी दिनाकरण से भी जुड़ा था। पलानीस्वामी ने पन्नीरसेल्वम के हाथ मिलाने के आह्वान को खारिज कर दिया और कई वजहें गिनाईं जिसमें पिछले महीने पार्टी मुख्यालय पर हमले के पीछे ओपीएस का हाथ होने का आरोप भी शामिल है। उन्होंने बिना कोशिशों के पद हासिल के लिए ओपीएस को फटकार लगाई।



पलानीस्वामी मद्रास हाई कोर्ट का रुख किया 
पलानीस्वामी ने बुधवार को एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसने 11 जुलाई के एआईएडीएमके जनरल काउंसिल के प्रस्तावों को मान्य नहीं घोषित किया, जिसमें पन्नीरसेल्वम को निष्कासित किया गया था और ईपीएस को पार्टी के अंतरिम महासचिव के रूप में चुना गया था। उच्च न्यायालय का रुख करने के एक दिन बाद ओपीएस ने बताया कि पहले के दोहरे नेतृत्व के साथ कभी कोई समस्या नहीं थी। दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता की अनुपस्थिति में पार्टी को चलाने के लिए संयुक्त नेतृत्व की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने कहा कि अम्मा की मृत्यु (दिसंबर 2016 में) के बाद, प्यारे भाई पलानीस्वामी सीएम बने और अच्छा सहयोग करते हुए हम आगे बढ़े। हमने कई लोकतांत्रिक कर्तव्यों का निर्वहन किया। 


पन्नीरसेल्वम ने यहां संवाददाताओं से कहा कि अम्मा की मृत्यु के बाद धर्मयुद्ध (उनके द्वारा अपदस्थ नेता वीके शशिकला और उनके परिवार के खिलाफ) किया गया था और पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की इच्छा के अनुसार यह एक नीति के रूप में तय किया गया था कि अन्नाद्रमुक संयुक्त नेतृत्व में काम करेगी। इसके आधार पर समन्वयक (ओपीएस) और संयुक्त समन्वयक (ईपीएस) पद सृजित किए गए।  

ओपीएस ने कहा कि अन्नाद्रमुक कार्यकर्ताओं ने पार्टी के संस्थापक दिवंगत सीएम एमजी रामचंद्रन और अम्मा के बेटों के रूप में अपना राजनीतिक रास्ता तय किया था, लेकिन कुछ मतभेद के कारण असामान्य स्थिति बनी। 1.5 करोड़ पार्टी कार्यकर्ता और एमजीआर व अम्मा के अच्छे शासन की इच्छा रखने वाले लोग चाहते हैं कि यह आंदोलन एकजुट रहे। पिछली कड़वाहट की कोई शिकायत किए बिना हमें उन्हें फेंक देना चाहिए।  

अन्नाद्रमुक नेतृत्व विवाद: हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इन्कार
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया, जिसमें चेन्नई के अन्नाद्रमुक मुख्यालय को पार्टी के अंतरिम महासचिव ई पलानीस्वामी को सौंपने के लिए कहा गया था। चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सीटी रविकुमार ने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम की याचिका पर राजस्व संभाग अधिकारी (आरडीओ) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के पलानीस्वामी गुट को नोटिस जारी किया। अन्नाद्रमुक के दोनों गुटों के बीच टकराव के दौरान 11 जुलाई को आरडीओ ने पार्टी मुख्यालय को सील कर दिया था।

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