PM Modi: पीएम मोदी NDA के मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे बैठक, कैबिनेट फेरबदल और परिसीमन बिल पर बढ़ीं अटकलें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बड़ी बैठक करने जा रहे हैं। बैठक में विकसित भारत, पश्चिम एशिया संकट, महंगाई और केंद्र-राज्य समन्वय पर चर्चा होगी। इसी बीच कैबिनेट फेरबदल और परिसीमन बिल को लेकर अटकलें तेज हैं। आइए, विस्तार से जानते हैं, इस होने वाली बैठक के बारे में...
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विस्तार
केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर होने जा रही एनडीए की बड़ी बैठक अब सिर्फ विकास योजनाओं की समीक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को एनडीए शासित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों के साथ अहम बैठक करेंगे। लेकिन इस बैठक से पहले ही दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में कैबिनेट फेरबदल, भाजपा संगठन में बदलाव और परिसीमन बिल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस में जारी बगावत और काकोली घोष दस्तीदार के पलटवार ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
आखिर एनडीए की बैठक में किन मुद्दों पर रहेगा फोकस?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक में विकसित भारत विजन, केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं और राज्यों के साथ समन्वय पर चर्चा होगी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का भारत की अर्थव्यवस्था, तेल सप्लाई और सप्लाई चेन पर क्या असर पड़ सकता है, इस पर भी विस्तार से बातचीत होने की संभावना है। बढ़ती महंगाई, ईंधन और रसोई गैस की कीमतों को लेकर भी रणनीति तैयार की जा सकती है। बैठक में केंद्र और राज्यों के साझा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा भी होगी। इसके बाद प्रधानमंत्री नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
क्या कैबिनेट फेरबदल की तैयारी शुरू हो गई है?
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि एनडीए की बैठक के बाद केंद्र सरकार में बड़ा फेरबदल हो सकता है। जून 2024 में लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद मोदी सरकार में अब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन हाल में केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन को राज्यसभा पुनर्नामांकन सूची से बाहर रखे जाने के बाद अटकलें और तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के अनुसार कहा जा रहा है कि कई केंद्रीय मंत्रियों को बैठक खत्म होने के बाद भी दिल्ली में रुकने को कहा गया है। इससे माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल और भाजपा संगठन दोनों में बदलाव हो सकते हैं।
परिसीमन बिल को लेकर क्यों बढ़ी हलचल?
भाजपा और एनडीए के भीतर परिसीमन बिल को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि संसद के मानसून सत्र में सरकार इस बिल को फिर से लाने की कोशिश कर सकती है। यह प्रस्ताव लोकसभा और विधानसभा सीटों के नए परिसीमन और महिलाओं के आरक्षण से जुड़ा है। अप्रैल में यह बिल लोकसभा में जरूरी समर्थन नहीं जुटा पाया था। लेकिन अब NDA अपनी संख्या बढ़ने को लेकर ज्यादा आत्मविश्वास में दिखाई दे रहा है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसद एनडीए के साथ आते हैं, तो सरकार को संसद में बड़ी ताकत मिल सकती है।
क्या टीएमसी की टूट एनडीए के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है?
तृणमूल कांग्रेस में जारी संकट अब राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करता दिख रहा है। अगर टीएमसी के बागी सांसद एनडीए का समर्थन करते हैं, तो संसद में एनडीए की ताकत और बढ़ सकती है। इससे परिसीमन बिल जैसे बड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। भाजपा पहले ही 12 साल पूरे होने पर देशभर में कार्यक्रम चला रही है और विपक्षी दलों की कमजोर होती स्थिति को अपने पक्ष में देख रही है।
एनडीए की यह बैठक सिर्फ प्रशासनिक समीक्षा नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक एजेंडे को तय करने वाली रणनीतिक बैठक मानी जा रही है। एक तरफ भाजपा सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने में जुटी है, तो दूसरी तरफ विपक्षी दलों के भीतर टूट और असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में केंद्र की राजनीति, संसद की रणनीति और बंगाल के सियासी समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।