केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल ने मंगलवार को रायपुर में एक बार फिर देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून की चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून लाया जाएगा।
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इससे पहले पिछले साल जुलाई में उत्तर प्रदेश के स्टेट लॉ कमीशन ने जनसंख्या नियंत्रण कानून का ड्राफ्ट जारी किया था। इस पर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे।
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वहीं, दूसरी ओर लोकसभा में केंद्र सरकार ने कई बार कहा है कि उसका जनसंख्या नियंत्रण से जुड़ा कोई भी कानून लाने का इरादा नहीं है।
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संविधान केंद्र और राज्य दोनों को जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन के लिए कानून बनाने की छूट देता है। हालांकि, देश में जनसंख्या नियंत्रण से संबंधित कोई राष्ट्रीय नीति नहीं है। जनसंख्या नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने को लेकर समय-समय पर याचिकाएं लगती रही हैं।
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सरकार की ओर से हुए पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे या NFHS-5) के आंकड़े हाल ही में आए हैं। इसके मुताबिक उत्तर प्रदेश, बिहार समेत केवल पांच राज्य ऐसे हैं जहां कुल प्रजनन दर 2.1 से ज्यादा है।
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मार्च 2018 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई गई। इसमें कोर्ट से अपील की गई कि वो केंद्र को जनसंख्या नियंत्रण के लिए दो बच्चों की पॉलिसी बनाने का निर्देश दे। इसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को सरकार के पास जाने को कहा गया।
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बीते तीन दशक में NFHS के पांच सर्वे आए हैं। 1992-93 में आए पहले सर्वे से अब आए पांचवें सर्वे के दौरान मुस्लिमों में प्रजनन दर में सबसे ज्यादा कमी आई है। 1992-93 में मुस्लिम महिलाओं में TFR 4.41 था। जो नए सर्वे में घटकर 2.36 रह गया है। हालांकि, अभी ये ये सभी धर्मों में सबसे ज्यादा है। वहीं, हिन्दू महिलाओं में इसी दौरान TFR 3.30 से घटकर 1.94 हो चुका है।