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Hindi News ›   India News ›   Special court formed in 18 states for early hearing of MPs and legislators with criminal image

आपराधिक छवि वाले सांसदों, विधायकों पर नकेल, 18 राज्य के हर जिले में विशेष अदालत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 14 Dec 2018 11:27 AM IST
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आपराधिक छवि वाले सांसदों और विधायकों के मामलों की तेज गति से सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट को कहा गया है कि वर्तमान एवं पूर्व विधि निर्माताओं से जुड़े आपराधिक मामलों में तेज गति से सुनवाई के लिए 18 राज्यों के सभी जिलों में विशेष अदालतों का गठन किए जाने की बात कही गई है।

बिहार और केरल के हर जिले में विशेष अदालतें होंगी गठित


वरिष्ठ अधिवक्ता और न्याय मित्र विजय हंसारिया ने शीर्ष अदालत से कहा कि उसके चार दिसंबर के आदेश के बाद बिहार और केरल के उच्च न्यायालयों ने हर जिले में विशेष अदालतें गठित करने के निर्देश जारी किये हैं। उन्होंने कहा कि इन विशेष अदालतों को तरजीह के आधार पर विशेष रूप से विधि निर्माताओं के मामलों पर गौर करने का निर्देश दिया जा सकता है।


हंसारिया ने बृहस्पतिवार को अपनी तीसरी स्थिति रिपोर्ट में कहा कि जिन 18 राज्यों में विधि निर्माताओं के खिलाफ मामलों की सुनवाई हेतु विशेष अदालतें नहीं हैं, उन्हें हर जिले में ऐसी अदालतें गठित करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।

शीर्ष अदालत में वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका विचाराधीन है जिसमें आपराधिक मामलों में दोषी नेताओं पर आजीवन पाबंदी और इन मामलों की तेज गति से सुनवाई हेतु विशेष अदालतें गठित किये जाने की मांग की गई है। शीर्ष अदालत ने हंसारिया को इस मामले में न्यायमित्र नियुक्त किया है। 

30 फीसदी सांसद दागी हैं

एडीआर की  रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सभा और लोकसभा के सासंदों की संख्या को पूरा मिला कर देखें तो, तकरीबन 30 फीसदी सांसद दागी हैं।  इनमें से 17 फीसदी सासंदों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। लोकसभा में 542 सासंदों में से 179 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो कुल संख्या का 33 फीसदी है।

वहीं, 114 के खिलाफ तो संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं जबकि राज्यसभा के 228 सासंदों में से 51 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें  20 के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस तरह से दोनों सदन के सासंदों को मिला कर देखें तो 770 सासंदों में से 230 दागी हैं, जो पूरी संख्या का 30 फीसदी है। 
 

भले ही फिलहाल बात विशेष अदालत की बिहार और केरल के राज्यों की गई है लेकिन आपराधिक छवि  वाले सांसदों और विधायकों की बात करें तो किसी भी राज्य का राजनेता इससे अछूता नहीं है। 

भाजपा में कांग्रेस से आपराधिक मामले में दोगुनी आगे  

तो चलिए जानते हैं कि आखिर किस पार्टी में कितने ऐसे सांसद हैं, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।  सिर्फ देश की दो बड़ी पार्टियों कांग्रेस और भाजपा की तुलना की जाए तो आपराधिक छवि और दागी सांसदों के मामले में भाजपा कांग्रेस से काफी आगे है। भाजपा  में करीब 32 फीसदी सांसदों के खिलाफ फिलहाल आपराधिक मामले चल रहे हैं, तो वहीं कांग्रेस के सासंदों के खिलाफ 15 फीसदी आपराधिक मामले दर्ज हैं।    

आपराधिक छवि वाले सांसद कितने 

भाजपा के 339 सांसदों में से 107 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं,  जिनमें से करीब 64 के खिलाफ तो संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।  वहीं, कांग्रेस के 97 सांसदों में से 15 के खिलाफ आपराधिक मामले और 8 के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।  कांग्रेस और भाजपा के सासंदों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की तुलना करें तो भाजपा के जहां 32 फीसदी सांसद दागी हैं, वहीं कांग्रेस के 15 फीसदी। 

अगर आपराधिक छवि वाले सांसदों की बात करें तो शिवसेना के 21 सासंदों में से 18 के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। हत्या, बलात्कार जैसे संगीन मामले 10 के खिलाफ हैं।  यानि शिवसेना के 86 फीसदी सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं।  

छोटी से लेकर बड़ी पार्टी के नेता हैं बाहुबली

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, एआईएडीएमके के 50 सांसदों में से 10 के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं जिसमें तीन के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।  लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के नौ सांसदों में से सात के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। जिनमें से 6 के खिलाफ तो संगीन आपराधिक मामले है।  टीडीपी के 22 सासंदों में से 7 के खिलाफ आपराधिक और 1 के खिलाफ संगीन आपराधिक मामला अदालत में लंबित है। जबकि शरद पवार की पार्टी एनसीपी के 11 सांसदों में से 6 दागी हैं इनमें पांच तो संगीन आपराधिक मामले के साथ अदालत के चक्कर लगा रहे हैं।  

रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के 6 सांसदों में से 4 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।  इनमें से तीन पर बलात्कार, मर्डर और अपहरण जैसे संगीन आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। समाजवादी पार्टी के 21 सासंदों में से तीन के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। नई- नई राजनीति में आई अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी दागी नेताओं से अछूती नहीं है। आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों में से 2 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।

नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के 8 सांसदों में से 2 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, वहीं 1 के खिलाफ तो संगीन आपराधिक मामले भी हैं। मायावती की पार्टी बसपा भी पीछे नहीं है। बसपा के 4 सांसदों में से 1 के खिलाफ आपराधिक और 1 खिलाफ संगीन आपराधिक मामला चल रहा है।  

हत्या से लेकर अपहरण तक के मामले में अव्वल हैं नेता

अगर नेताओं पर चल रहे आपराधिक मामलों की बात करें तो हत्या से लेकर अपहरण तक के मामलों में देश की दोनों ही पार्टियों के नेता अव्वल हैं। अपहरण के मामले में बिहार के 12 सांसदों व विधायकों पर मामले दर्ज हैं जबकि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के विधायकों की संख्या दूसरे नंबर है।

जबकि हत्या के मामले में भी भाजपा के 19 सासंदों/विधायकों के खिलाफ मामले दर्ज है। वहीं, कांग्रेस के 6 सांसदों/ विधायकों के खिलाफ और उत्तर प्रदेश सांसद, विधायक टॉप पर हैं।  उत्तर प्रदेश में ऐसे 15 विधायक और सांसद है जिनपर हत्या के मामले चल रहे हैं। 

विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले

भाजपा के 1451 विधायकों में 31 फीसदी विधायकों के ऊपर आपराधिक मामले चल रहे हैं जिनमें 20 फीसदी विधायकों के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं कांग्रेस  के 773 विधायकों में 26 फीसदी विधायक के खिलाफ अदालतों में आपराधिक मामले दर्ज हैं।
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