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आसमान से आ रही आफत: 24 जुलाई को पृथ्वी से टकरा सकता है स्टेडियम जितना विशाल एस्टेरोइड, जानें कैसे बचेगी धरती?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Wed, 21 Jul 2021 10:11 AM IST

सार

स्टेडियम जितना विशाल एस्टेरोइड बहुत तेज गति से धरती की ओर बढ़ रहा है, जो 24 जुलाई को धरती से टकरा सकता है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने इस बेहद खतरनाक बताया है।
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Asteroids - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

कोरोना संकट, चक्रवाती तूफान, बाढ़ और भूकंप हर तरह से तबाही ही तबाही मची है। इस बीच, अब स्टेडियम जितना विशाल एस्टेरोइड बहुत तेज गति से धरती की ओर बढ़ रह है, जो 24 जुलाई को धरती से टकरा सकता है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने इस बेहद खतरनाक बताया है। 

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रिपोर्ट के मुताबिक, यह विशाल एस्टेरोइड आठ किलोमीटर प्रति सेकंड यानी कि करीब 28,800 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की ओर आ रहा है। इसकी धरती की ओर बढ़ने की यह गति इतनी अधिक है कि अगर कोई ग्रह या वस्तु किसी एस्टेरोइड से टकराती है, तो वह तबाह हो जाएगी। एस्टेरोइड नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट (एनईओ) 20 मीटर चौड़ा है और यह 28,70,847,607 किमी की दूरी से दिखाई देगा, जो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की कुल दूरी का आठ गुना है।




एनईओ 24 जुलाई की रात अपोलो नाम की कक्षा से गुजरेगा। हालांकि, इसके पृथ्वी से टकराने की कोई संभावना नहीं है। फिर भी वैज्ञानिकों ने इसे संभावित खतरनाक एस्टेरोइड की श्रेणी में रखा है। इसलिए नासा के वैज्ञानिक लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं। बता दें कि इससे पहले भी एस्टेरोइड 2021KT1 पृथ्वी की कक्षा से गुजरा था, जो एफिल टावर के आकार के बराबर था। 

100 वर्षों में 22 एस्टेरोइड बन सकते हैं पृथ्वी के लिए खतरा

एस्टेरोइड आम तौर पर बृहस्पति ग्रह की कक्षा में पाए जाते हैं। कुछ एस्टेरोइड दूसरे ग्रहों की कक्षा में भी घूमते पाए गए हैं और इसी ग्रह के साथ-साथ सूरज की भी परिक्रमा करते रहते हैं।

वैज्ञानिकों के पास अब तक लगभग दस लाख एस्टेरोइड की जानकारी है। इनमें से 22 अगले सौ वर्षों में पृथ्वी के लिए खतरा भी बन सकते हैं। नैनीताल स्थित आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान के अंतरिक्ष विज्ञानी डॉ. शशि भूषण पांडे ने बताया कि लगभग 4.5 अरब साल पहले जब हमारी सौर प्रणाली विकसित हो रही थी, तब गैस और धूल के कुछ ऐसे बादल जो ग्रह के रूप में विकसित नहीं हुए, बाद में एस्टेरोइड बन गए।


 
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