पहल: जन्माष्टमी के मौके पर हिसार की जेल में 'रागिनी' लॉन्च, तीन बंदियों ने गाया हरियाणवी लोक गीत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार झा Updated Mon, 30 Aug 2021 01:02 PM IST

सार

हरियाणा जेल रेडियो का हिस्सा रहे बंटी सिंह, सत्यवान और भजन सिंह की इसमें अहम भूमिका है। तिनका तिनका फाउंडेशन कला और रचनात्मकता पर जोर देने के साथ ही भारत की जेलों में क्रांति लाने का प्रयास कर रहा है। रागिनी हरियाणवी लोक संगीत का एक रूप है। बता दें कि जेल रेडियो जेल सुधारक डा. वर्तिका नन्दा की संकल्पना पर आधारित है।
हिसार जेल में रागिनी लॉन्च
हिसार जेल में रागिनी लॉन्च - फोटो : self
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विस्तार

हरियाणा की हिसार केंद्रीय जेल के तीन बंदी सुर्खियों मे हैं। जेल के तीन बंदियों (बंटी सिंह, भजन सिंह और सत्यवान) ने जेल रेडियो की थीम पर अपनी रागिनी बनाई है और इसे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर लॉन्च किया गया है। भगवान श्री कृष्ण का जन्म जेल में ही हुआ था, इसीलिए उन्होंने यह दिन चुना ताकि वह अपनी रागिनी में जेल का दर्द और आजादी का महत्व को समझा सकें। इस गीत को लिखने और गाने का काम भी इन बंदियों ने किया है। रागिनी कुछ इस तरह से शुरू होती है कि खुशी वेले गीत मुंडा लगया, रेडियो जाकी तै मुंडा छौंण लगया.. आशा और सुधार को दर्शाता यह गीत बताता है कि रेडियो जाकी ने खुशी के गीत गाना शुरू कर दिया है, वह जेल रेडियो के माध्यम से पहचान प्राप्त कर रहे हैं। असल में यह प्रयोग हरियाणा में तिनका तिनक फाउंडेशन की ओर से शुरू किए गए हैं, जो जेल रेडियो का एक हिस्सा है। हरियाणा जेल रेडियो तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक डा. वर्तिका नंदा की संकल्पना पर आधारित हैं। उन्होंने ही इन जेलों में बंदियों का चयन और उन्हें प्रशिक्षण दिया है। जेल के अधीक्षक दीपक शर्मा, उप अधीक्षक वरुण कुमार और वर्तिका नन्दा ने रागिनी को रिलीज करते हुए बेहद खुशी जताई है।
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हरियाणा जेल रेडियो पर किया जाएगा लॉन्च
 हरियाणा जेल रेडियो का हिस्सा रहे बंटी सिंह, सत्यवान और भजन सिंह की इसमें अहम भूमिका है। तिनका तिनका फाउंडेशन कला और रचनात्मकता पर जोर देने के साथ ही भारत की जेलों में क्रांति लाने का प्रयास कर रहा है। रागिनी हरियाणवी लोक संगीत का एक रूप है। कैदी से गायक बने तीनों लंबे समय से जेल में सजा काट रहे हैं। तीनों में सबसे छोटा 29 साल का बंटी सिंह वर्ष 2013 से हिसार सेंट्रल जेल में बंद है। जबकि 52 वर्षीय भजन सिंह वर्ष 2015 और 37 वर्षीय सत्यवान वर्ष 2018 से जेल में हैं। यह पहली बार है जब उनकी आवाज को बड़े पैमाने पर श्रोताओं तक पहुंचायी जा रही है।


जेल में संगीत प्रयोग
यह संगीतमय प्रयोग जेल रेडियो का एक हिस्सा है, जिसे हरियाणा की जेलों में पेश किया जा रहा है। हरियाणा में कुल 19 जेल हैं, जिनमें से 7 में रेडियो लाने का काम पहले और दूसरे चरण में पूरा किया जा चुका है, ये तीनों तिनका तिनका फाउंडेशन द्वारा रेडियो जॉकी के रूप में चुने गए 47 कैदियों में शामिल हैं।



इस प्रयास के लिए क्या कहती हैं डा. नंदा
जेल सुधारक और हरियाणा की जेलों में रेडियो लाने की पहल करने वाली डा. वर्तिका नन्दा का कहना है कि तिनका तिनका फाउंडेशन जेलों में उम्मीदों के इंद्रधनुष बनाने की कोशिश कर रहा है। यह पाडकास्ट इंद्रधनुष का एक प्रमुख रंग है। अभी कुछ दिनों पहले अंबाला जेल में शुरू का गाना भी बहुत पसंद किया गया था। हम जेल रेडियों के जरिए बंदियों की प्रतिभा को निखारने के साथ ही स्थानीय भाषा और बोलियों को भी बढ़ावा देना चाहते हैं। यह तिनका माडल आफ प्रिजन रिफॉर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह गाना हम तिनका जेल रेडियो के पाडकास्ट और स्पाटीफाई जैसे ऑनलाइन प्लेटफार्म पर जारी कर रहे हैं।



हरियाणा की जेलों से रिलीज होने वाला यह पांचवा गाना है। चूंकि जेल रेडियो पर सिर्फ उस जेल के बंदी ही गाने को सुन सकेंगे , इसलिए तिनका तिनका यूट्यूब पर अपने पाडकास्ट के जरिए ऐसी कोशिशों को लॉन्च करता है ताकि देश की अलग-अलग जेलों में इन आवाजों को पहुंचाया जा सके। यह दुनिया का पहला ऐसा पाडकास्ट है जो पूरी तरह से जेलों को समर्पित है।

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