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उत्तर प्रदेश चुनाव: कहीं भाजपा के 'बंगाल' कार्ड में तो नहीं फंस गए अखिलेश यादव, आशंकित हैं पार्टी नेता!

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 20 Jan 2022 04:39 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव से पहले जिस तरह से टीएमसी नेताओं की टोली भाजपा में आई थी और बनर्जी की भारी जीत के बाद उसी टोली के नेता बारी-बारी से वापस टीएमसी में लौटने लगे थे। क्या वही कार्ड अब भाजपा ने उत्तर प्रदेश में तो नहीं खेला है, सपा नेता अब इसी उधेड़बुन में लगे हैं...

UP Election 2022: Akhilesh Yadav asked the alliance partners to contest on some seats on the symbol of Samajwadi Party
अखिलेश यादव के साथ सहयोगी दल - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

उत्तर प्रदेश चुनाव में राजनीतिक पार्टियां रोजाना नए दांव चल रही हैं। जब से टिकट वितरण शुरू हुआ है, सभी दलों में भगदड़ मची है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं सपा प्रमुख अखिलेश यादव, सबसे ज्यादा खुश नजर आ रहे थे। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पिछले सप्ताह जब भाजपा के मंत्रियों और विधायकों की टोली सपा में आई, तो अखिलेश यादव का उत्साह देखने लायक था। भाजपा से आए नेताओं और खुद के सहयोगी दलों के भरोसे को लेकर एकाएक अखिलेश यादव आशंकित हो उठे हैं। कहीं वे भाजपा के 'ममता बनर्जी कार्ड' में तो नहीं फंस गए हैं।



पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव से पहले जिस तरह से टीएमसी नेताओं की टोली भाजपा में आई थी और बनर्जी की भारी जीत के बाद उसी टोली के नेता बारी-बारी से वापस टीएमसी में लौटने लगे थे। क्या वही कार्ड अब भाजपा ने उत्तर प्रदेश में तो नहीं खेला है, सपा नेता अब इसी उधेड़बुन में लगे हैं। सपा खेमे में ऐसी चर्चा हो रही है कि जिसमें सहयोगी दलों से कहा जा रहा है कि वे अपने कोटे की कुछ सीटों पर सपा के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने दें। सहयोगी दलों का कोटा घटाने के लिए मंथन हो रहा है।

भाजपा ने समझ ली थी 'भरोसे' की थ्योरी

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अखिलेश यादव, पूरी तरह से भाजपा की रणनीति को नहीं समझ पाए। उन्होंने योगी के खिलाफ कई मुद्दों को लेकर प्रदेश में बना माहौल तो कैश कर लिया, मगर असल खेल से वे चूक गए। यूं कह सकते हैं कि वे भाजपा के जाल में फंस गए हैं। वह जाल, जो योगी ने नहीं बुना है, बल्कि उसे खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तैयार किया है। भले ही शाह, पश्चिम बंगाल में अपनी पार्टी को वैसी सफलता नहीं दिला पाए, जैसा सोचा गया था। उन्होंने वहां का एक मंत्र उत्तर प्रदेश के चुनाव में इस्तेमाल कर दिया। उत्तर प्रदेश की राजनीति के जानकार एवं प्रसिद्ध चिंतक और लेखक डॉ. राघव शरण शर्मा ने बताया, पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने टीएमसी नेताओं में जबरदस्त सेंध लगाई थी। उस वक्त लग रहा था कि जैसे भाजपा ही खेल की मुख्य सूत्रधार है। बाद में जब वही नेता दोबारा से टीएमसी में जाने लगे तो भाजपा को 'भरोसे' की थ्योरी समझ आई। अब भाजपा ने वही थ्योरी अखिलेश पर इस्तेमाल की है। जो नेता आज भाजपा छोड़ रहे हैं, उनका क्या भरोसा कि वे चुनाव के बाद दोबारा से पाला बदल लें। हो सकता है कि ये अदला-बदली, भाजपा द्वारा तैयार की गई एक रणनीति का हिस्सा हो।

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