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Exclusive: 'राजनीति में पूरी भागीदारी होगी तो महिला जवाबदेही तय करेगी', जानिए आधी आबादी के लिए क्या बोलीं प्रियंका गांधी

विनोद अग्निहोत्री विनोद अग्निहोत्री
Updated Thu, 02 Dec 2021 05:17 PM IST

सार

प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि इस सरकार के कार्यकाल में जनता ने बहुत संघर्ष झेला, आर्थिक मंदी और महंगाई की मार सही। कोरोना के चलते लाखों परिवार टूटकर बिखर गए, मगर सरकार की तरफ से सहूलियत नहीं मिली।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी - फोटो : amar ujala
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विस्तार

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का कहना है कि उत्तर प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याएं हैं। महिलाओं की सुरक्षा और सक्शक्तीकरण, दलितों और कमजोर वर्गों पर अत्याचार, भ्रष्टाचार, खराब कानून व्यवस्था के भी सवाल हैं। कोरोना के दौर में कुप्रबंधन से हुई मौतें भी हैं। ये सब प्रमुख चुनावी मुद्दे हैं। कांग्रेस इन्हें प्रमुखता से उठाते हुए चुनाव को पूरी तरह विकास पर केंद्रित रखने की कोशिश करेगी। मुख्यमंत्री के चेहरे की घोषणा के सवाल पर उनका कहना है कि अभी चुनाव में तीन महीने हैं, इंतजार कीजिए सब पता चल जाएगा। चुनाव के बाद अपनी राष्ट्रीय भूमिका पर उनका कहना है, उत्तर प्रदेश मेरे दिल के बेहद करीब है और मैं यहां के विकास के लिए काम करती रहना चाहूंगी। पेश हैं प्रियंका गांधी वाड्रा से साक्षात्कार के प्रमुख अंश...
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1. उत्तर प्रदेश में आप लगातार जनता के बीच जा रही हैं, आपको जनता का मूड कैसा लग रहा है?
जनता दुखी और नाराज है। जहां भी जाती हूं, लोग अपनी निराशा व्यक्त करते हैं। भाजपा ने बातें बहुत कीं, लेकिन डिलीवरी के नाम पर उनके पास सिर्फ झूठा प्रचार है। उत्तर प्रदेश देश का तीसरा सबसे गरीब प्रदेश है। इस सरकार के कार्यकाल में जनता ने बहुत संघर्ष झेला, आर्थिक मंदी और महंगाई की मार सही। कोरोना के चलते लाखों परिवार टूट कर बिखर गए, मगर सरकार की तरफ से सहूलियत नहीं मिली। किसान साल भर आंदोलन करता रहा, उसका लगातार अपमान किया गया। प्रदेश भर में महंगाई, बेरोजगारी बहुत गंभीर समस्याएं हैं, जिन्हें सुलझाने के लिए इस सरकार के पास कोई समाधान नहीं है।


2. कभी यूपी नेहरू-गांधी परिवार का अभेद्य किला था, फिर आखिर कांग्रेस यहां कमजोर क्यों हो गई?
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की कमजोरी नब्बे के दशक से शुरू हुई, जब हमारी पार्टी ने अपनी ज़मीन गठबंधन कर-कर के खोई। उस समय जो निर्णय लिए गए कुछ परिस्थितियों को देख कर लिए होंगे, उन पर मैं आज टिप्पणी नहीं करना चाहती, मगर जब एक राजनैतिक दल लगातार 100-200 सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगा, तब उसका कमजोर होना स्वाभाविक ही है। हमारा नेता - कार्यकर्ता भी मायूस रहा, कि हम संघर्ष करेंगे और अंत में लड़ने का मौक़ा तक नहीं मिलेगा तो उस मायूसी को लेकर निष्क्रिय हो गया। आज यह स्थिति बदली है। आज हमारे नेता और कार्यकर्ता लड़ने और संघर्ष करने के लिए तैयार हैं।

3. चुनाव में कितनी सफलता मिलेगी, जबकि संगठन लगातार कमजोर हुआ है।
हमने संगठन को मजबूत बनाने के लिए पिछले दो सालों से काफी काम किया है। आज हमारी पार्टी जमीन पर है, गांव-गांव में हमारा कार्यकर्ता सक्रिय है। आपने खुद महसूस किया होगा कि कांग्रेस का कार्यकर्ता ही जनता की आवाज जोरों से उठा रहा है। जबकि अन्य विपक्षी दल जैसे बसपा और सपा, जनता के मूल मुद्दों को उठाने में पूर्णतया असमर्थ रहे हैं। सरकारी एजेंसियों के डर से बसपा पूर्णतया चुप है तो सपा सिर्फ  चुनाव के समय ही थोड़ी सक्रिय हुई है।  मुझे गर्व है कि हमारा संगठन ग्राम स्तर तक जिंदा और ऊर्जावान हुआ है।

4. आपके मुताबिक प्रदेश में प्रमुख चुनावी मुद्दे क्या हैं?
उत्तर प्रदेश के प्रमुख मुद्दे महंगाई, बेरोजगारी, किसानों का शोषण और महिलाओं की असुरक्षा है। मेरा मानना है कि महिलाओं का राजनीतिक सशक्तीकरण उनके संघर्षमय जीवन का बोझ हल्का करने के लिए बहुत जरूरी है। राजनीति में ज्यादा महिलाओं का होना राजनीतिक माहौल और समाज दोनों को सुधारेगा। यूपी में पिछली सरकारों ने और खासतौर पर भाजपा की सरकार ने राजनीति को धर्म और जाति से इतना ज्यादा जोड़ दिया कि विकास और डिलीवरी पर नेताओं की जवाबदेही खत्म हो चुकी है। मेरा प्रयास है कि उन मुद्दों पर चर्चा की जाए जो जनता की समस्याओं का हल निकालने से जुड़े हैं।

5. भाजपा, सपा, बसपा के मुकाबले कांग्रेस इस चुनावी लड़ाई में अलग कैसे है?
कांग्रेस के लिए विकास ही मुख्य मुद्दा है। इसलिए पार्टी ने अपने अभियान की शुरुआत उत्तर प्रदेश की प्रगति की प्रतिज्ञाओं से की है। हम किसानों का कर्ज माफ करेंगे, बिजली बिल हाफ  करेंगे और कोरोना काल का बिल माफ करेंगे। हमने गेहूं-धान की एमएसपी ढाई हजार रुपये, गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल देने की प्रतिज्ञा की है। महिलाओं को 40 प्रतिशत टिकट, लड़कियों को स्मार्टफोन और स्कूटी देने की बात कही है। महिलाओं के लिए एक अलग घोषणापत्र तैयार कर रहे हैं। ये सब वो बाते हैं जिनसे उत्तर प्रदेश में एक सकारात्मक राजनीति का रास्ता तैयार होगा।

6. क्या ये कांग्रेस का महिला कार्ड है?
आप इसे ‘कार्ड’ कह रहे हैं, लेकिन महिलाओं की भागीदारी की बात मेरे दिल के बहुत करीब है। कुछ दिन पहले मैं महोबा में थी तो एक बहन मुझसे मिलने आई। उसके 14 साल के बेटे की निर्मम हत्या कर दी गई थी। आरोपियों के प्रशासन के करीब होने के कारण सही जांच और कार्रवाई तक नहीं हुई। इतने गहरे दुख में भी उस महिला में न्याय के लिए लड़ने का साहस है। उससे दो दिन पहले फाफामऊ (प्रयागराज)में पूरे परिवार की हत्या कर 17 साल की लड़की से सामूहिक दुष्कर्म किया गया। परिवार की महिलाएं घबराई हुई थीं। फिर भी न्याय की आवाज वे उठा रही थीं। उन्नाव हो या हाथरस, जघन्य अपराधों के बावजूद महिलाएं मजबूती से अपनी लड़ाई खुद लड़ रही हैं। लेकिन आज उन्हें हल्के में लिया जा रहा है।

7. भाजपा का कहना है कि उसने महिलाओं को मुफ्त गैस सिलेंडर देकर सशक्त किया है
राजनीतिक पार्टियां समझती हैं कि एक उज्जवला कनेक्शन देकर महिलाओं के प्रति उनकी ज़िम्मेदारी ख़त्म हो गई है। महिलाओं को सशक्त करने की बात सिर्फ़ कागजों और विज्ञापनों पर होती हैं। मैं महिलाओं को सशक्त करना चाहती हूं - इसका सबसे बड़ा प्रमाण यही है कि हमने 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने का फैसला किया है। क्योंकि राजनीति में पूरी भागीदारी होगी तो महिला लड़ेगी और जवाबदेही तय करेगी। देश की आधी आबादी की शक्ति अपार है - इस शक्ति को राजनीति में लाकर बहुत बदलाव आ सकता है, और हां, काफ़ी हद तक ध्रुवीकरण की राजनीति की काट भी यही है। महिला समाज की परवरिश करती है, उसे जोड़ती है, महिला सहृदय होती है और उसके अंदर करुणा होती है। इन सारे गुणों की आज हमारी पुरुषप्रधान राजनीति में बहुत जरूरत है।

8. क्या कांग्रेस आपको या किसी और को अपना सीएम चेहरा घोषित करेगी? 
अभी चुनाव के लिए तीन महीने बाक़ी हैं - थोड़ा इंतज़ार कीजिए- पता चल जाएगा। 

9. कांग्रेस ने अपने प्रतिज्ञा पत्र में जो वादे किए उन पर जनता कैसे विश्वास करे? 
यह वादे हमने बहुत सोच-समझ कर किए हैं। इन्हें देश के पूर्व वित्तमंत्री और राष्ट्रीय स्तर के हमारे वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा और आर्थिक आकलन करके ही तय किया गया है क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि कोई भी ऐसा वादा किया जाए जो पूरा न किया जा सके। देखिए, जिसकी नीयत सही है, जिसके दिल में जनता के लिए सही मायने में आदर है, वह जनता को गुमराह करने का काम नहीं कर सकता।  

पार्टी के स्तर पर, हमने यह वादे पहले भी निभाए हैं - 72,000 करोड़ रुपए के किसानों के कर्ज कांग्रेस ने ही माफ़ किए। हमारी सरकार के कार्यकाल के दौरान पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के सिलेंडर कभी इतने महँगे नहीं हुए। मनरेगा द्वारा ग्रामीण रोजगार कांग्रेस की सरकार ने ही शुरू किए। छुट्टा जानवरों की समस्या को छत्तीसगढ़ सरकार ने बढ़िया तरह से सुलझाया है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार वर्तमान में धान की ख़रीद 2500 रु में कर रही है। तो जो प्रतिज्ञाएँ हमने ली हैं, वह सम्भव हैं और हम उन पर खरे उतरेंगे। देखिए, यूपी ने बसपा का राज देखा है, सपा का देखा है और भाजपा का भी। एक बात साफ़ है - कि शासन प्रशासन, विकास की नीतियां और अर्थव्यवस्था चलाने की क्षमता कांग्रेस में ही है।

10. आपने प्रवासी मज़दूरों, महिलाओं दलितों की जो लड़ाई लड़ी, क्या कांग्रेस को उसका  चुनावी फ़ायदा होगा?
अगर मैं यह लड़ाई चुनावी फ़ायदे के लिए लड़ रही होती तो मेरा काम संघर्ष से भरा नहीं होता। मेरे लिए ये लड़ाई देश की लड़ाई है। आज जो जनता के लिए आवाज़ उठाता है, उस पर सरकार आक्रमण करती है, जबकि हमारे संविधान में लिखा है कि हर देशवासी का हक़ समान है, उसे अपने अधिकार के लिए लड़ने का हक़ है, अपनी आवाज़ उठाने का हक़ है। मेरी दादीजी कहती थीं कि अन्याय देखते हुए उनसे चुप नहीं रहा जाता था। मेरे दिल में भी यही भावना जीवित है। मैं चुप रहूँ, अपने देश और अपने संविधान को नष्ट होते देख कुछ न करूँ - ये सम्भव ही नहीं। मैं अपने पिता का छलनी शरीर घर लायी, उनकी शहादत इसी संविधान की रक्षा में हुई। मैं उनकी शहादत के साथ कभी ग़द्दारी नहीं कर सकती। जब तक हमारा देश भाजपा की विनाशकारी नीतियों से आज़ाद नहीं होगा, तब तक मेरा संघर्ष ख़त्म नहीं होगा।  

11. आपकी सभाओं और कार्यक्रमों में आने वाली भीड़ क्या वोटों और सीटों में तब्दील हो पाएगी?
जैसा कि मैंने कहा, हमने संगठन को मज़बूत बनाने के लिए काफ़ी काम किया है, हमारे प्रतिज्ञा पत्र 4.5 करोड़ घरों में पहुँचाने का कार्य अभी चल रहा है। हमने पूरे प्रदेश में प्रतिज्ञा यात्राएं की जिसके ज़रिए लगभग 30 लाख घरों तक हमारी बात कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं ने पहुँचाईं। हमने हर विधानसभा में महंगाई के विरोध में लगातार दस दिनों तक लगभग 70 किलोमीटर की पदयात्रा निकाली। अभी हमारा संगठन गांव-गांव में प्रतिज्ञाएं लेकर जा रहा है। इसके अलावा चुनाव की पूरी तैयारी है और हम सब दिन-रात संघर्षरत हैं। कांग्रेस ने आम जनता के मुद्दों को पुरज़ोर तरीक़े से उठाया है और यही हमारी चुनावी रणनीति है।

12. क्या धर्मनिरपेक्ष दलों के अलग अलग लड़ने से भाजपा को फ़ायदा नहीं होगा?
भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी और महंगाई का कोई धर्म नहीं होता। और वास्तव में चुनाव के असल मुद्दे यही हैं। आज अधिकांश दलों के लिए यह सब दिखावे की बातें हैं। वे सिर्फ अपनी स्वार्थसिद्धि में लगे हुए हैं। अफ़सोस यह है कि यूपी में तीन मुख्य विपक्षी दलों में से दो दल भाजपा के जाल में फँसे हुए हैं। बसपा पूरी तरह से निष्क्रिय है, बहन मायावती जी के बयान भाजपा के बयानों से मिलते जुलते हैं और उनकी पार्टी सड़क पर दिखती ही नहीं। सपा अपने पूरे दम से लड़ नहीं रही है। एनआरसी – सीएए के समय, कोरोना महामारी और तमाम मुद्दों को उठाने के समय इनके नेता ग़ायब थे। अभी भी उनका आक्रमण कांग्रेस पर ज़्यादा और भाजपा पर कम है। इसकी वजह एक ही हो सकती है कि केंद्र सरकार की एजेंसियों से डरकर ये लड़ाई से पीछे हट रहे हैं। भाजपा की फ्रंटल बन चुकी सरकारी एजेंसियों का इन विपक्षी पार्टियों पर रुख़ देखते हुए कुछ सवाल तो ज़रूर उठते हैं।

13. क्या सपा या बसपा से गठबंधन हो सकता है?
हमने पिछले दो साल में जमीन पर बहुत मेहनत की है। अब संगठन हर जगह है और वह अपनी ताकत दिखा रहा है। प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र वाराणसी में, मुख्यमंत्री के जिले गोरखपुर में और बुंदेलखंड में जैसी रैलियां हुई हैं, वे हमारे संगठन के साथियों की ही मेहनत का नतीजा हैं। जहां तक चुनाव के बाद का सवाल है तो यूपीए का उदाहरण सामने है। जब-जब सांप्रदायिक ताकतों को रोकने की जरूरत पड़ी है, कांग्रेस ने हमेशा सबको साथ लेकर चलने की नीति अपनाई है।

14. यूपी के चुनावों के बाद आपकी राष्ट्रीय राजनीति में क्या भूमिका होगी?
मेरी इच्छा है कि चुनाव के बाद भी मैं यूपी में काम करती रहूं। चुनाव का जो भी नतीजा हो, यूपी को बेहाली की स्थिति से निकालने का काम करने के लिए प्रतिबद्धता और निरंतरता महत्वपूर्ण है। यूपी मेरे दिल के बहुत करीब है और इसे छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता। इसके साथ-साथ जो भी जिम्मेदारी पार्टी मुझे देना चाहे, उसे मैं निभाने के लिए तैयार रहूंगी।

15. संविधान दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को एक परिवार की पार्टी कहा है। आप इसका क्या जवाब देंगी?
कितनी बड़ी विडंबना है कि संविधान को तार-तार करने वाली पार्टी और स्वयं प्रधानमंत्री संविधान दिवस पर ऐसी बातें करते हैं। चुनी हुई सरकारों को गिराने में, असांविधानिक तरीके से कानून पारित करके, स्वतंत्र आवाजों को दबाकर, भाजपा ने संविधान के मूल्यों पर बार-बार प्रहार किया है। सच्चाई यह है कि मोदी परिवारवाद के विरोधी नहीं हैं, सिर्फ एक ही परिवार से उन्हें दिक्कत है और वह इसलिए कि मेरा परिवार इनके सामने न कभी झुका है, न कभी झुकेगा। वह कुछ भी कर लें, अपनी एजेंसियों को हमारे पीछे छोड़ दें, हमें बदनाम करवाएं, हम पर तरह-तरह के केस लगवाकर हमारे परिवार के सदस्यों को सताएं, हमें जेल में डलवाएं कुछ भी कर लें, हम पीछे नहीं हटेंगे। रही बात परिवारवाद की, तो मैं भाजपा में तमाम ऐसे नेताओं के नाम गिना सकती हूं जो राजनीतिक परिवारों से आते हैं और उन्हें खूब प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

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