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TRF: कौन है इसका आका, घाटी में कैसे पनपा यह आतंकी संगठन? जानें सबकुछ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Tue, 04 Oct 2022 10:09 AM IST
सार

What Is TRF in Hindi: जम्मू-कश्मीर में डीजी जेल हेमंत कुमार लोहिया की हत्या जिम्मेदारी आतंकी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) ने ली है। ये टीआरएफ क्या है? ये नया आतंकी संगठन कब बना? आखिर इसका मकसद क्या है? इसके आका कौन हैं? आइए जानते हैं सबकुछ...

TRF ने ली डीजी जेल एचके लोहिया की हत्या की जिम्मेदारी
TRF ने ली डीजी जेल एचके लोहिया की हत्या की जिम्मेदारी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

DG Jail Hk lohia Murder: जम्मू-कश्मीर में डीजी जेल हेमंत कुमार लोहिया की हत्या के बाद घाटी एक बार फिर दहल गई है। लोहिया की हत्या इतनी बेरहमी से की गई कि उनके शव को देखने वालों की भी एक बार रूह कांप गई। कांच की बोतल से पहले उनका गला रेता गया, शरीर पर कई जगह वार किया गया। इसके बाद शव को जलाने की भी कोशिश की गई।

सूत्रों की मानें तो इस नृशंस हत्या की जिम्मेदारी आतंकी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) ने ली है। हालांकि, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अपनी शुरुआती जांच में किसी भी आतंकी एंगल से इनकार किया है। ऐसे में सवाल उठता है कि ये टीआरएफ क्या है? ये नया आतंकी संगठन कब बना? आखिर इसका मकसद क्या है? इसके आका कौन हैं? तो यहां हम आपको इन सभी सवालों के जवाब देंगे। आइए जानते हैं आतंक के नए नाम टीआरएफ के काले चिट्ठे के बारे में...

कब सामने आया यह संगठन?

TRF की कहानी 14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमले के साथ ही शुरू होती है। कहा जाता है कि इस हमले से पहले ही इस आतंकी संगठन ने घाटी के अंदर अपने पैर पसारने शुरू कर दिए थे। धीरे-धीरे यह संगठन अपनी ताकत को बढ़ाता चला गया और इसे पाकिस्तान समर्थित कुछ आतंकी संगठनों के साथ खुफिया एजेंसी आईएसआई का भी साथ मिला। पांच अगस्त 2019 को जैसे ही जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाई गई, यह संगठन पूरे कश्मीर में सक्रिय हो गया। 

कौन है टीआरएफ का आका?

टीआरएफ के उदय की असल कहानी पाकिस्तान से शुरू होती है। घाटी में बढ़ती आतंकी घटनाओं के साथ-साथ पाकिस्तान का छुपा चेहरा दुनिया के सामने आने लगा था। धीरे-धीरे पाकिस्तान पर अपने यहां पनप रहे आतंकी संगठनों पर कार्रवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बनता जा रहा था। पाक समझ चुका था कि उसे अब लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों पर कुछ कार्रवाई करनी ही होगी, लेकिन उसे यह भी डर था कि इससे कश्मीर में उसकी जमीन खिसक सकती है। ऐसे में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और लश्कर-ए तैयबा ने मिलककर नए आतंकी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' की नींव रखी। 

क्या है TRF का मकसद?

खास तौर पर टीआरएफ को फाइनेंसिशयल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की कार्रवाई से बचने के लिए बनाया गया था। दरअसल, FATF ने पाकिस्तान को अपनी ग्रे सूची में रखा था। इसके साथ ही उस पर कई प्रतिबंध भी लगाने शुरू कर दिए थे, जसके बाद टीआरएफ अस्तित्व में आया। इसका मकसद घाटी में फिर से 1990 वाला दौर वापस लाना है। टीआरएफ का मुख्य उद्देश्य लश्कर-ए-तैयबा मामले में पाकिस्तान पर बढ़ते दबाव को कम करना व पाकिस्तानी में स्थानीय आतंकवाद को बढ़ावा देना है। 

कैसे तय होता है TRF का शिकार?

आपने बीते कुछ महीनों में कश्मीर में टारगेट किलिंग के कई मामले देखे होंगे। इनमें से अधिकतर के पीछे TRF का ही हाथ था। टीआरएफ के हैंडलर सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं। इसके साथ ही वे सोशल मीडिया पर कश्मीर के अंदर होने वाली हर राजनीतिक, प्रशासनिक व सामाजिक गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखते हैं। इसके जरिए यह संगठन अपने टारगेट को भी चुनता हैं। बीते दिनों टीआरएफ कई लोगों की हिटलिस्ट भी जारी कर चुका है। कई भाजपा नेता, सैन्य व पुलिस अधिकारी भी इस आतंकी संगठन के टारगेट पर रहते हैं। 
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