कांग्रेस का आरोप: 'एक्सपेरिमेंट' का नतीजा भुगत रहा है कश्मीर, टारगेट किलिंग रोकने के लिए ये काम ही काफी है

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 21 Oct 2021 04:51 PM IST

सार

कांग्रेस के नेता कहते हैं, देश की सरकार वहां के मसले को समझने में सक्षम नहीं है। स्थितियों को कैसे सुधारना है, सरकार को ये भी नहीं मालूम। जम्मू-कश्मीर में अभी जो ताजा रिपोर्ट आई है, उसके मुताबिक, हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा बेरोजगारी जम्मू-कश्मीर में है। देश में बेरोजगारी की दर साढ़े सात फीसदी है, जम्मू-कश्मीर में 21.6 फीसदी है...
श्रीनगर आतंकवादी हमला
श्रीनगर आतंकवादी हमला - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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विस्तार

जम्मू-कश्मीर में दो सप्ताह के भीतर 32 नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया जाता है। केंद्र सरकार की मीटिंग-मीटिंग से वहां के हालात नहीं सुधरेंगे। आज घाटी में जो टारगेट किलिंग हो रही हैं, वह सब केंद्र के 'एक्सपेरिमेंट' का नतीजा है। जम्मू-कश्मीर में केंद्र के शासन से चीजें बिगड़ रही हैं। केंद्र सरकार ने सोचा था कि वहां 'राज्य का दर्जा' खत्म करने से चीजें बेहतर हो जाएंगी, मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ। यह बात कांग्रेस पार्टी के नेता प्रो. गौरव वल्लभ ने कही है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। केंद्र सरकार के सारे एक्सपेरिमेंट देश ने देख लिए हैं। इससे पहले कि स्थितियां काबू से बाहर हो जाएं, जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया जाए।
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पहली बार प्रांत पूछ-पूछ कर हत्या

प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा, घाटी में भारत मां के नौ सपूत अपनी मातृभूमि की सेवा करते हुए शहीद हो गए हैं। इनमें दो जेसीओ लेवल के अधिकारी हैं। इतना सब कुछ होने के बाद सरकार 'मीटिंग-मीटिंग' से आगे नहीं बढ़ पा रही है। बता दें कि घाटी में बुधवार को आतंकी मुठभेड़ में एक और जवान शहीद हो गया है। बतौर प्रो. वल्लभ, ऐसा पहली बार हुआ है कि चुन-चुन कर हत्याएं की गई हैं। पिछले 15 सालों से कश्मीर में, जम्मू में आतंकवाद होता था, पर कभी भी किसी से ये पूछ कर उसकी हत्या नहीं की जाती थी कि तुम किस प्रांत के हो, यहां क्या करने आए हो। हत्या का आधार नहीं होता था, मगर आज हत्या का आधार है। जम्मू-कश्मीर में इतना कुछ हो जाता है और केंद्रीय गृह मंत्री का वक्तव्य तक नहीं आता। उनका ज्यादातर समय अपने गृह राज्य मंत्री को बचाने में लग रहा है। वे कश्मीर को लेकर कुछ बताना भी नहीं चाहते।

सबसे ज्यादा बेरोजगारी जम्मू-कश्मीर में

केंद्र सरकार, जम्मू-कश्मीर के मुद्दे की गहराई तक नहीं पहुंच पा रही है, इस बाबत कांग्रेस के नेता कहते हैं, देश की सरकार वहां के मसले को समझने में सक्षम नहीं है। स्थितियों को कैसे सुधारना है, सरकार को ये भी नहीं मालूम। जम्मू-कश्मीर में अभी जो ताजा रिपोर्ट आई है, उसके मुताबिक, हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा बेरोजगारी जम्मू-कश्मीर में है। देश में बेरोजगारी की दर साढ़े सात फीसदी है, जम्मू-कश्मीर में 21.6 फीसदी है। अगर केंद्र सरकार, जम्मू-कश्मीर के हालात सुधारने के प्रति गंभीर है, तो उसे सबसे पहले जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देना होगा। वजह, एक्सपेरिमेंट देश ने देख लिए हैं। वहां लगाए गए केंद्र के शासन से स्थितियां खराब हो रही हैं। लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकारों को राज्य का शासन चलाने का अधिकार दिया जाए। देश के संविधान को खत्म करने का प्रयास न करें। जम्मू कश्मीर में रह रहे दूसरे राज्यों के लोग वहां पर भय के कारण पलायन कर रहे हैं। उन लोगों को सुरक्षा उपलब्ध करवाई जाए। सरकार के लिए इससे बड़ी विफलता कोई नहीं हो सकती, यदि वह अपने लोगों को देश के भीतर ही सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहती है।

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