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Zojila Tunnel: जोजिला सुरंग में हुआ ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू, साल के 365 दिन खुली रहेगी कश्मीर-लद्दाख की राह

अमृतपाल सिंह बाली, मिनिमर्ग Published by: Nikita Gupta Updated Tue, 09 Jun 2026 01:22 PM IST
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सार

जोजिला सुरंग में सफल ब्रेकथ्रू के साथ कश्मीर और लद्दाख को सालभर जोड़ने वाली रणनीतिक परियोजना ने बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। करीब 13.1 किमी लंबी यह सुरंग 2028 तक खुलने की उम्मीद है।

Zojila Tunnel Breakthrough Asia’s Longest Road Tunnel Set to Link Kashmir and Ladakh Year-Round
जोजिला सुरंग में ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

लद्दाख के दुर्गम पहाड़ों के बीच मंगलवार को उस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना गया जिसका इंतजार दशकों से किया जा रहा था। देश की सबसे महत्वाकांक्षी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल जोजिला सुरंग में सफल ब्रेकथ्रू हासिल कर लिया गया। विस्फोट के जरिए सुरंग के दोनों सिरों को जोड़ने की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच सालभर निर्बाध संपर्क का सपना अब हकीकत के बेहद करीब पहुंच गया है।



केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने लद्दाख के मिनीमर्ग स्थित ईस्ट पोर्टल पर आयोजित कार्यक्रम में इस ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू ब्लास्ट का साक्षात्कार किया। अधिकारियों के अनुसार यह उपलब्धि निर्धारित समय से लगभग छह महीने पहले हासिल की गई है।
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राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के अधिकारियों ने बताया कि सुरंग का करीब 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसके फरवरी 2028 तक आम जनता के लिए खोल दिए जाने की संभावना है। ब्रेकथ्रू के बाद अब अगले सात से आठ महीनों में शेष सिविल कार्य पूरे किए जाएंगे, जिसके बाद विद्युत एवं अन्य तकनीकी कार्य शुरू होंगे।
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करीब 11,578 फीट की ऊंचाई पर निर्मित यह सुरंग 13.153 किलोमीटर लंबी, 9.5 मीटर चौड़ी और 7.57 मीटर ऊंची है। घोड़े की नाल के आकार वाली यह सिंगल-ट्यूब, दो-लेन सड़क सुरंग दुनिया की सबसे लंबी द्वि-दिशीय सुरंगों में शामिल है। परियोजना के ऑथोरिटी इंजीनियर यूसुफ इसहाघपोर रहीमाबादी के अनुसार निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और अधिकांश प्रमुख संरचनात्मक कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सुरंग मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के बालटाल को लद्दाख के द्रास जिले के मिनीमर्ग से जोड़ेगी। सुरंग के साथ लगभग 18 किलोमीटर लंबी एप्रोच सड़क भी विकसित की जा रही है। पूरी परियोजना की कुल लंबाई 31 किलोमीटर है, जिसमें सड़कें और पुल भी शामिल हैं।

परियोजना का निर्माण कार्य कर रही मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने हिमालय की जटिल और संवेदनशील भूगर्भीय परिस्थितियों में सुरंग निर्माण के लिए न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) का उपयोग किया। इस तकनीक की मदद से कठिन चट्टानी संरचनाओं और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के बीच सुरक्षित तरीके से सुरंग का निर्माण संभव हो सका।

सुरंग के चालू होने के बाद श्रीनगर से लेह के बीच यात्रा और अधिक सुगम हो जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, जहां पहले जोजिला दर्रे को पार करने में एक से डेढ़ घंटे तक का समय लगता था, वहीं सुरंग के माध्यम से यह दूरी महज 15 मिनट में तय की जा सकेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारी बर्फबारी के कारण हर साल सर्दियों में कई महीनों तक बंद रहने वाला जोजिला दर्रा अब सालभर आवागमन के लिए खुला रहेगा।

यह परियोजना न केवल लद्दाख के लोगों के लिए बेहतर संपर्क और आर्थिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की आवाजाही और रसद आपूर्ति को भी नई मजबूती प्रदान करेगी। जोजिला सुरंग का यह ब्रेकथ्रू भारत के बुनियादी ढांचे और इंजीनियरिंग क्षमता की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

इस अवसर पर जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला शामिल हुए। इसके अलावा अन्य प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी और निर्माण कार्यों में शामिल अधिकारी और कर्मचारियों के साथ साथ स्थानीय लोग भी शामिल हुए।

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