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जम्मू-कश्मीर : फारूक अब्दुल्ला ने दोहराई मांग, कहा- चुनी सरकार के पास पूरे अधिकार नहीं, राज्य का दर्जा बहाल हो

माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Thu, 12 Mar 2026 04:14 PM IST
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सार

नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि वहां चुनी हुई सरकार होने के बावजूद उसे पर्याप्त अधिकार नहीं मिले हैं। साथ ही उन्होंने बढ़ती गरीबी, महंगाई और वैश्विक हालात के असर को लेकर चिंता जताई।

National Conference President Farooq Abdullah gave statement regarding full statehood in Jammu and Kashmir
फारूक अब्दुल्ला - फोटो : ANI
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विस्तार

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने गुरुवार को एक बार फिर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि वहां चुनी हुई सरकार तो है, लेकिन उसके पास वे अधिकार नहीं हैं जो होने चाहिए।

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा राज्य का दर्जा न होने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री पर हुए हमले से जोड़ने संबंधी सवाल पर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव इस आश्वासन के साथ कराए गए थे कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि चुनी हुई सरकार है, लेकिन उसके पास आवश्यक अधिकार नहीं हैं। चुनाव इस वादे के साथ हुए थे कि राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा और लोगों की समस्याएं दूर की जाएंगी। कई साल बीत गए वह राज्य का दर्जा कहां है?
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अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन संसद और सुप्रीम कोर्ट दोनों के सामने दिया गया था। जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा न होने के कारण अपराध बढ़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अपराध पूरे देश में होते हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि बढ़ती गरीबी और वैश्विक हालात से आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने कहा कि देश में हर जगह अपराध होते हैं। गरीबी बढ़ रही है और वैश्विक स्थिति, खासकर ईरान से जुड़े युद्ध के कारण, हमें भी प्रभावित करेगी। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई से सबसे ज्यादा परेशानी मध्यम वर्ग को होगी।

उन्होंने कहा कि अगर कोई साजिश है तो उसे सामने आना चाहिए। लेकिन मैं केंद्र सरकार और उपराज्यपाल से निवेदन करता हूं कि जब वे बार-बार कहते हैं कि स्थिति पूरी तरह सुधर गई है, तो यह भी देखें कि क्या माहौल वास्तव में इतना सुरक्षित हो गया है कि हम सम्मान के साथ स्वतंत्र रूप से घूम सकें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं और भारत की ताकत उसके धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक चरित्र में है।

अब्दुल्ला ने कहा कि हमारी राय अलग हो सकती है, लेकिन भारत एक स्वतंत्र और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। हर किसी को अपनी आवाज उठाने का अधिकार है। हम असहमत हो सकते हैं, लेकिन हमें साथ रहना होगा। विश्व स्तर पर शांति की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वह वैश्विक नेताओं से चल रहे युद्धों को खत्म करने का अनुरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि मैं उनसे अनुरोध करूंगा, क्योंकि उनकी दोस्ती डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू से भी है। भगवान के लिए उनसे कहें कि युद्ध रोक दें। युद्ध खत्म करना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अलगाववादी नेता शब्बीर शाह को जमानत दिए जाने पर अब्दुल्ला ने कहा कि लोगों को देश को बेहतर बनाने के लिए आगे आना चाहिए। लोग आगे आएं और इस देश को बेहतर बनाने में मदद करें, ताकि यहां लोग सम्मान और मानवता के साथ रह सकें। हमें नफरत छोड़नी होगी। कश्मीरी पंडितों के लंबे समय से विस्थापन का जिक्र करते हुए उन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव और मेल-मिलाप की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे हिंदू भाई अब भी अपने घरों से दूर रह रहे हैं। यह कब तक चलेगा? 34 साल हो गए हैं। अब समय आ गया है कि हम साथ मिलकर रहें।

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