Zoji-la Tunnel: 15 मिनट में पूरा होगा एक घंटे से अधिक का सफर, जानें एशिया की सबसे बड़ी 'जोजिला टनल' की खासियत
लेह में बन रही एशिया की सबसे बड़ी सुरंग 'जोजिला टनल' अब अपने निर्माण के अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। श्रीनगर कारगिल लेह नेशनल हाईवे पर 11,578 फीट ऊंचाई पर 14.5 किलोमीटर लंबी जोजिला टनल का निर्माण करीब 7000 करोड़ की राशि से हो रहा है। इसके बनने से कारगिल तक सड़क संपर्क पूरे साल बहाल हो जाएगा। बर्फबारी के चलते अभी सात महीने सड़क संपर्क बंद रहता है।
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भारत के बुनियादी ढांचा विकास के इतिहास में मंगलवार को एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। दुनिया की सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित और सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब द्वि-दिशात्मक जोजिला सुरंग में वह बहुप्रतीक्षित ब्रेकथ्रू ब्लास्ट सफल हो गया, जिसका देश को दशकों से इंतजार था। इस ऐतिहासिक सफलता के साथ ही कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में निर्बाध और सुरक्षित संपर्क बहाल रखने के लिए निर्माण कार्य अगले चरण में पहुंच जाएगा।
लद्दाख को हर मौसम में कश्मीर और शेष भारत से जोड़ने वाली सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण जोजिला सुरंग के निर्माण में मंगलवार को एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। सुरंग के भीतर अंतिम चट्टानी दीवार को ब्लास्ट के जरिए सफलतापूर्वक तोड़ दिया गया, जिसे इंजीनियरिंग की भाषा में ब्रेकथ्रू कहा जाता है।
इस अंतिम सफल विस्फोट के साथ ही सुरंग के दोनों छोर अब पूरी तरह से आपस में जुड़ गए हैं, जिससे परियोजना के निर्माण कार्य में एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। यह उपलब्धि परियोजना के निर्माण कार्य में एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है, जिससे कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच सालभर निर्बाध सड़क संपर्क स्थापित करने की दिशा में कार्य और तेज हो जाएगा।
- 11,578 फीट की ऊंचाई पर निर्मित
- 13.153 किलोमीटर लंबी है मूल सुरंग
- 9.5 मीटर चौड़ी व 7.57 मीटर ऊंची है सुरंग
- घोड़े की नाल के आकार वाली सुरंग में दो लेन की है
सुरंग के शुरू होने के बाद जोजिला दर्रे से गुजरने में लगने वाला एक से 1.5 घंटे का समय घटकर मात्र 15 मिनट रह जाएगा। यह श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर सालभर आवाजाही सुनिश्चित करेगी। ये कश्मीर के गांदरबल जिले के बालटाल को लद्दाख के द्रास जिले के मिनीमार्ग से जोड़ेगी। ये रास्ता भारी बर्फबारी के कारण हर वर्ष कई महीनों तक बंद रहता है।
परियोजना की कुल लंबाई 31 किलोमीटर है जिसमें 18 किलोमीटर लंबी एप्रोच सड़कें और पुल शामिल हैं। मुख्य सुरंग बालटाल से मिनीमार्ग तक फैली हुई है और हिमालय की कठिन चट्टानी संरचनाओं को भेदकर बनाई गई है।
मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) इस सुरंग को बना रहा है। न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) से बनाई गई है। अधिकारियों ने इसे भारत की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक बताया है। इसमें सेमी-ट्रांसवर्स वेंटिलेशन सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी, रेडियो संचार व्यवस्था, निर्बाध बिजली आपूर्ति और स्मार्ट टनल (एससीएडीए) प्रबंधन प्रणाली जैसे अत्याधुनिक सुविधाएं हैं।
सुरंग खुलने से सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की त्वरित तैनाती और रसद आपूर्ति को भी मजबूती की जा सकेगी। अलावा पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। लद्दाख तक निर्बाध आवागमन हो सकेगा। स्थानीय निवासी बशारत अहमद ने कहा कि सुरंग शुरू होने व्यापार और वस्तुओं के आदान-प्रदान को भी नई गति मिलेगी। क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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