हिंदी की राह में कठिनाइयां अवश्य हैं किन्तु उसका भविष्य उज्ज्वल है...

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                            '' हिंदी की राह में कठिनाइयां अवश्य हैं किन्तु उसका भविष्य उज्ज्वल है। आज बहुत सी ऐप आ गये हैं, टेक्नोलॉजी के नए क्षेत्र खुल रहे हैं जिसके माध्यम से हम हिंदी को फैला सकते हैं।'' ये बातें भारतीय दूतावास नीदरलैंड्स के राजदूत प्रदीप कुमार रावत ने विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित परिचर्चा  'हिंदी की वैश्विकता' एवं कवि गोष्ठी में विचार करते हुए कही। अध्यक्ष पद बोलते हुए उन्होंने कहा कि '' भाषा संस्कृति के लिए जरूरी है। हमारी भारतीयता हमारी भाषाओं  के कारण महत्व रखती है। बाजार या आर्थिक कारणों से हिंदी के बढ़ने की एक वजह है कि हिंदुस्तान में यदि विदेशियों को काम करना है तो उन्हें अंग्रेजी के अलावा हिंदी भाषा सीखनी होगी। उन्होंने बताया कि जब वे  विज्ञान पढ़ कर इंजीनियरिंग कक्षा में गए तो अंग्रेजी में पढ़ाई होने के कारण समझ ही में नहीं आ रहा था तो यह विडंबना प्रारंभ में होती है। उन्होंने कहा कि हिंदी के प्रचार प्रसार की दिशा में देश के बुनियादी कारणों को समझना होगा।''  उन्होंने गोष्ठी की रचनाओं और हिंदी में लिखे जा रहे साहित्य को देखते हुए कहा कि '' आज साहित्य की क्वालिटी उच्च स्तर की है । इसे पढ़ने के लिए लोग हिंदी सीखना चाहेंगे। अच्छा साहित्य ही लोगों को हिंदी पढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। दूसरा क्षेत्र है मनोरंजन। बहुत से लोग हिंदी के गाने गाते हैं पर उसका अर्थ नहीं जानते। हम उन्हें ध्यान में रखें। यह उन्हें हिंदी से जोड़ने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यहां मैंने देखा है कि डच व्यक्ति आपस में मिलते हैं तो डच में ही बोलते हैं। वैसा ही हिंदी भाषियों को करना चाहिए कि वे आपस में मिलें तो हिंदी बोलें। इससे भाषा का विस्तार होगा। हिंदी की जड़ें मजबूत होंगी।''  
                                                                     
                            

गोष्ठी में देश विदेश में अनेक विद्वानों से शिरकत की तथा हिंदी के विश्वव्यापी पहचान को रेखांकित किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता नीदरलैंड्स के राजदूत प्रदीप कुमार रावत ने की और इसका संयोजन राजूदतावास के गांधी सांस्कृतिक केंद्र के प्रभारी निदेशक शिवमोहन सिंह ने किया। परिचर्चा एवं गोष्ठी की शुरुआत शिवमोहन सिंह 'शुभ्र' ने की और बताया कि नीदरलैंड्स में हिंदी एवं भारतीय संस्कृति के प्रचार प्रसार की दिशा में दूतावास अनेक आयोजन आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान कर रहा है। परिचर्चा गोष्ठी एवं काव्य गोष्ठी का संचालन करते हुए हिंदी के सुपरिचित कवि आलोचक एवं भाषाविद डॉ. ओम निश्चल ने सर्वप्रथम आजादी के अमृत महोत्सव के आलोक में इसे आजादी के अमृत महोत्सव के साथ उत्सवता का महोत्सव और भाषा का महोत्सव भी बताया और कहा कि यह भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का महोत्सव भी है तथा उन्होंने  विश्व हिंदी दिवस के माहात्म्य से अवगत कराते हुए सहभागी कवियों चिंतकों का परिचय दिया। आगे पढ़ें

4 months ago

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