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विश्व की खोज : संतूर मेरा जीवन संगीत

Discovery of the World: Santoor My Life Music
                
                                                                                 
                            
विश्वप्रसिद्ध संगीतकार और संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा का आज मुंबई में कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया। वे 84 वर्ष के थे। वे पिछले छह महीने से किडनी संबंधी समस्याओं से पीड़ित थे और डायलिसिस पर थे। प्रस्तुत है उनकी आत्मकथा 'संतूर मेरा जीवन संगीत' से एक अंश-
                                                                                                
जब मैं बारह वर्ष का था, संयोगवश मैंने पहली बार जम्मू-कश्मीर का सूफियाना संगीत सुना, जिसके साथ एक वाद्ययन्त्र बज रहा था जिसे वे सन्तूर कहते थे। मैं इससे अधिक आकर्षित नहीं हुआ और न ही इसने मुझे अधिक प्रभावित किया। जैसे ही मैंने इसे सुना, इसे अपने ख्यालों से निकाल दिया; इस बात की कल्पना किये बिना कि मेरे जीवन में इसकी क्या भूमिका निर्दिष्ट थी। मैं गाता और तबला बजाता रहा।
             जब मेरे पिता रेडियो जम्मू के उच्च पद पर आसीन थे, हमारे मुख्यमन्त्री बख्शी गुलाम मुहम्मद, जो शिष्ट और परिष्कृत व्यक्ति थे और संगीतानुभावी थे तथा मेरे पिता को अत्यधिक पसन्द करते थे, ने उनका स्थानान्तरण थोड़े समय के लिए रेडियो श्रीनगर में कर दिया। उन्होंने पिता जी की नियुक्ति इसलिए की ताकि वहाँ के संगीतकार पिता जी के संगीत ज्ञान और अनुभव से सीख सकें। वहाँ कश्मीर में मेरे पिता ने पहली बार सन्तूर सुना और वे उसकी ध्वनियों पर पूर्णत: मुग्ध हो गये। मेरी जानकारी के बिना उन्होंने एक वाद्ययन्त्र खरीदा और प्रयोग करने लगे कि उस पर शास्त्रीय संगीत बजाया जा सकता है। जब मैं चौदह वर्ष का था, एक दिन अचानक वे घर लौटे और मुझे विचित्र आकार का मलमल में लिपटा एक बक्सा दिया। डरते-डरते उसे मैंने खोला तो उसमें एक सन्तूर पाया। मैं आश्चर्यचकित रह गया। मुझे एक झटका और लगा जब उन्होंने मुझे दृढ़ता से कहा—''आज से यह तुम्हारा वाद्ययन्त्र होगा।”
             मैं पूरी ईमानदारी से स्वीकार करता हूँ मैं कोई अधिक उत्साहित नहीं हुआ। मैं इस बात से निराश था कि मुझे अपने पहले के सभी प्रयास एक ऐसे नये अनजान यन्त्र के लिए छोडऩे पड़ेंगे जिसने मुझे उत्तेजित भी नहीं किया था। पर मेरे पिता का निश्चय दृढ़ था। उन्होंने सन्तूर में बड़ी सम्भावनाएँ देखीं और बहुत गम्भीरता से कहा, ''बेटा मेरे शब्द याद रखना, शिवकुमार शर्मा और सन्तूर आनेवाले वर्षों में एक-दूसरे के पर्याय हो जाएँगे। शून्य से आरम्भ करने का साहस रखो, तुम एक अन्वेषक के रूप में जाने जाओगे।”  
 
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4 months ago

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