लेखिका गीतांजलि श्री का उपन्यास रेत समाधि बुकर सम्मान के लिए शॉर्ट-लिस्ट हुआ है। यह हिंदी का पहला उपन्यास है जो इस सम्मान के लिए चुना गया है। इसका अंग्रेज़ी अनुवाद 'टूंब ऑफ़ सैंड' है जिसे डेज़ी रॉकवेल ने अनूदित किया है। उपन्यास अंतिम छह में अपनी जगह बना चुका है।
राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इस किताब में एक 80 वर्षीय विधवा की कहानी है जो अपने पति की मौत के बाद तनाव में चली जाती है। लेकिन जब वह अपने दायरे से बाहर आने की कोशिश करती है तो सब कुछ बदल जाता है। यह उपन्यास कई तरह के भावों को एक साथ पिरोये हुए है।
रेत समाधि के इंटरनेशनल बुकर प्राइज़ की शॉर्टलिस्ट में पहुंचने पर गीतांजलि श्री ने कहा, "यह बेहद ख़ास तरह की मान्यता है। कोई कृति सुदूर बैठे अनजान लोगों को तभी आकर्षित कर सकती है, जब उसमें अपने विशिष्ट सांस्कृतिक संदर्भ को पार करने के साथ ही सार्वभौमिक और मानवीयता को स्पर्श करने की क्षमता हो। यही सच्चा सत्यापन है। काम अच्छा होना चाहिए, अनुवाद बेहतरीन होना चाहिए। रेत समाधि की अंग्रेज़ी अनुवादक डेज़ी रॉकवेल और मेरे लिए यह बहुत अच्छा पल है। यह दिखाता है कि हमारा संवाद कितना समृद्ध रहा है। यही अच्छे अनुवाद का काम है।"
राजकमल प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी ने ख़ुशी जताते हुए कहा कि "इससे स्पष्ट हो गया है कि हिंदी समेत भारतीय भाषाओं का उत्कृष्ट लेखन दुनिया का ध्यान अब तेज़ी से आकर्षित कर रहा है। "
अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार हर साल किसी ऐसी किताब को दिया जाता है जिसका अंग्रेज़ी में अनुवाद हुआ हो और जो आयरलैंड या ब्रिटेन में प्रकाशित हुई हो। रेत समाधि का अंग्रेज़ी अनुवाद 'टिल्टेड एक्सिस' से प्रकाशित हुआ है। 50 लाख रुपये के साहित्यिक पुरस्कार के लिए इस उपन्यास की अब पांच अन्य किताबों से प्रतिस्पर्धा है। पुरस्कार की घोषणा छह मई को होगी।
गीतांजलि श्री अब तक 5 उपन्यास सहित कई कहानियां लिख चुकी हैं।
3 months ago
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