पद्मश्री काका हाथरसी के हास्य-व्यंग्य पर उनके पौत्र अशोक गर्ग से ख़ास बातचीत

काका हाथरसी
                
                                                             
                            हिंदी काव्य में हास्य-व्यंग की विधा का मूल स्त्रोत भारतीय संस्कृति, उसकी विविधता और जीवन दर्शन में देखा जा सकता है। समाज में निहित कमियों और दोषों को गंभीर तथा गाढ़े शब्दों से व्यक्त न करते हुए, हास्य-व्यंग के साथ मीठी और गहरी चोट करना और इसी बहाने समाज का तनाव कम करना हमारी लोक परंपरा का हिस्सा रहा है। 
                                                                     
                            

हिंदी काव्य में हास्य-व्यंग की इसी परंपरा को और आगे तक ले जाकर विदेशों तक में हिंदी हास्य-व्यंग का परचम फहराने वाले श्रेष्ठ व्यंगकार व हास्य सम्राट ‘काका हाथरसी’  का आज जन्मदिवस है। काका हाथरसी ने हिंदी हास्य कवि के रूप में विश्वभर में ख्याति अर्जित की। साथ ही अपनी प्रतिभा से विश्व में हिंदी की पताका भी फहराई और हाथरस का नाम भी विश्व में रोशन किया।

हंसी का पर्याय माने जाने वाले काका हाथरसी का जन्म 18 सितंबर 1906 को हुआ था। 1985 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने 'पद्मश्री' की उपाधि से नवाजा। काका ने फ़िल्म 'जमुना किनारे' में अभिनय भी किया था। 18 सितंबर को 1995 को 89 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ। इसे विरला संयोग ही कहेंगे कि काका हाथरसी का जन्म व अवसान दिवस एक ही दिन है। 
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1 year ago

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