घर की याद आई: माहेश्वर तिवारी 

घर की याद आई: माहेश्वर तिवारी
                
                                                             
                            धूप में
                                                                     
                            
जब भी जले हैं पाँव
घर की याद आई

नीम की
छोटी छरहरी
छाँह में
डूबा हुआ मन
द्वार का
आधा झुका
बरगद : पिता
माँ : बँधा आँगन
सफर में
जब भी दुखे हैं घाव
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6 months ago

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