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अशोक चक्रधर की कविता: ज़रा मुस्कुरा तो दे

अशोक चक्रधर की कविता: ज़रा मुस्कुरा तो दे
                
                                                                                 
                            माना, तू अजनबी है
                                                                                                

और मैं भी, अजनबी हूँ
डरने की बात क्या है
ज़रा मुस्कुरा तो दे।

हूँ मैं भी एक इंसां
और तू भी एक इंसां
ऐसी भी बात क्या है
ज़रा मुस्कुरा तो दे।

ग़म की घटा घिरी है
तू भी है ग़मज़दा सा
रस्ता जुदा-जुदा है
ज़रा मुस्कुरा तो दे।

हाँ, तेरे लिए मेरा
और मेरे लिए तेरा
चेहरा नया-नया है
ज़रा मुस्कुरा तो दे। आगे पढ़ें

1 month ago

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