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Bhagwati Charan Verma Poetry: तुम जो कुछ हो वही रहोगे, मेरी मानो

कविता
                
                                                                                 
                            देखो, सोचो, समझो, सुनो, गुनो औ' जानो
                                                                                                

इसको, उसको, सम्भव हो निज को पहचानो
लेकिन अपना चेहरा जैसा है रहने दो,
जीवन की धारा में अपने को बहने दो

तुम जो कुछ हो वही रहोगे, मेरी मानो ।

वैसे तुम चेतन हो, तुम प्रबुद्ध ज्ञानी हो
तुम समर्थ, तुम कर्ता, अतिशय अभिमानी हो
लेकिन अचरज इतना, तुम कितने भोले हो
ऊपर से ठोस दिखो, अन्दर से पोले हो

बन कर मिट जाने की एक तुम कहानी हो । आगे पढ़ें

1 month ago

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