भारत भूषण: मेरी नींद चुराने वाले, जा तुझको भी नींद न आए

भारत भूषण: मेरी नींद चुराने वाले, जा तुझको भी नींद न आए
                
                                                             
                            मेरी नींद चुराने वाले, जा तुझको भी नींद न आए 
                                                                     
                            
पूनम वाला चाँद तुझे भी सारी-सारी रात जगाए 

तुझे अकेले तन से अपने, बड़ी लगे अपनी ही शैय्या 
चित्र रचे वह जिसमें, चीरहरण करता हो कृष्ण-कन्हैया 
बार-बार आँचल सँभालते, तू रह-रह मन में झुँझलाए 
कभी घटा-सी घिरे नयन में, कभी-कभी फागुन बौराए 
मेरी नींद चुराने वाले, जा तुझको भी नींद न आए  आगे पढ़ें

1 month ago

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