सर्वेश्वर दयाल सक्सेना: चुनिंदा कविताएं जिनमें जीवन है, उम्मीद है...

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना: चुनिंदा कविताएं जिनमें जीवन है, उम्मीद है...
                
                                                             
                            सर्वेश्वर दयाल सक्सेना हिन्दी साहित्य जगत के एक ऐसे हस्ताक्षर हैं, जिनकी लेखनी से कोई विधा अछूती नहीं रही। चाहे वह कविता हो, गीत हो, नाटक हो अथवा आलेख हों। कठोरता से उन्होंने व्यवस्था में व्याप्त बुराइयों पर आक्रमण किया। 15 सितंबर 1927 को बस्ती (उ.प्र) में जन्मे सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने एक छोटे से कस्बे से अपना जीवन शुरू किया लेकिन जिन रचनात्मक उचाईयों को उन्होंने छुआ, वह अपने आप में ऐतिहासिक है। 
                                                                     
                            


तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है
कि दिशाएँ पास आ गयी हैं,
हर रास्ता छोटा हो गया है,
दुनिया सिमटकर
एक आँगन-सी बन गयी है
जो खचाखच भरा है,
कहीं भी एकान्त नहीं
न बाहर, न भीतर।

हर चीज़ का आकार घट गया है,
पेड़ इतने छोटे हो गये हैं
कि मैं उनके शीश पर हाथ रख
आशीष दे सकता हूँ,
आकाश छाती से टकराता है,
मैं जब चाहूँ बादलों में मुँह छिपा सकता हूँ।
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8 months ago

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