मजाज़ अपने फ़न के साथ-साथ अपनी हाज़िर-जवाबी के लिए भी मशहूर थे...

Asrar ul haq majaz the poet of romanticism and revolution
                
                                                             
                            
किसी माशूक के ख़तों में इन्क़लाबी आग लगा देने के बाद हवा में जो ख़ुशबू रवां होगी उसका नाम होगा ‘असरार उल हक़ मजाज़’ और इस हवा की कैफ़ियत है कि यह जितनी नशातअंगेज़ महसूस होती है उतनी ही ग़मज़दा भी है जिसे ग़ालिबन किसी ग़मख्वार की ज़रूरत भी हो।


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बोल अरी ओ धरती बोल

1 week ago

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