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प्रेमचंद के पात्रों के साथ युग समाज और राष्ट्र की समस्याएँ लगी चली आती हैं

मुंशी प्रेमचंद
                
                                                                                 
                            प्रेमचंद जी जो जिए वही रचा,  उन्होंने ने अपने उपन्यासों में चरित्र को ही प्रधानता दी। यूरोपीय उपन्यास की विकास की भी यही दिशा है। विश्व के तीन महान साहित्यकार मैक्सिम गोर्की, शरद्चंद और प्रेमचंद 1936 में ही दुनिया से चल बसे ! शरदचंद के उपन्यास पढ़ने पर पाठकों की आँखें नम होती हैं मगर ऐसा नहीं है कि प्रेमचंद के उपन्यास पढ़ने पर आँखें नम नहीं होती हैं। जो आँसू आँख से निकलकर आँख में ही छलछलाकर ही रह जाय, उस आँसू में ज्यादा टीस होती है। प्रेमचंद के उपन्यास आंखों में आँसू लाते हैं मगर वे आँसू पाठक को क्रांति के लिए मजबूर कर देते हैं।
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                
                                             
                                                
                                             
                                                
                                             
                                                
                                             
                                                
                                                                
                                        
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1 month ago

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