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त्रिलोचन की कविताओं में अखंड भारत की आवाज़ें शामिल हैं

त्रिलोचन की कविताओं में अखंड भारत की आवाज़ें शामिल हैं
                
                                                                                 
                            जब भौंरे ने आकर पहले पहले गाया
                                                                                                

कली मौन थी। नहीं जानती थी वह भाषा
इस दुनिया की, कैसी होती है अभिलाषा
इस से भी अनजान पड़ी थी। तो भी आया

जीवन का यह अतिथि, ज्ञान का सहज सलोना
शिशु, जिस को दुनिया में प्यार कहा जाता है,
स्वाभिमान-मानवता का पाया जाता है
जिस से नाता। उस में कुछ ऐसा है टोना

बिना बुलाए जो आता है प्यार वही है।
प्राणों की धारा उस में चुपचाप बही है।

त्रिलोचन जी मुझे सिर्फ़ इसलिये आकर्षित नहीं करते कि वे हिन्दी की प्रगतिशील कविता के आधार स्तम्भों में से एक हैं। बल्कि इसलिये कि उनकी कवितायें बहुत सधी हुई और निर्मल कवितायें हैं। उनमें समूचा हिन्दुस्तान बोलता है। हिन्दुस्तान के खेत खलिहान और यहाँ की ज़मीन बोलती है। बल्कि दूसरे शब्दों में कहूँ यहाँ का जनजीवन बोलता है, यानी पूरे भारत के जनपद बोलते हैं। वे अकृत्रिम सौन्दर्य और मानवीय गरिमा के कवि हैं। उनकी कविता हमारे जीवन संग्राम की कविता है। छोटे-छोटे विषय, छोटे-छोटे दुख उनकी कविताओं में बिंधे हुए मिलेंगे। आगे पढ़ें

1 year ago

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