विज्ञापन

इरादे मेरे दिल के

                
                                                                                 
                            इरादे मेरे दिल के समझा करे कोई
                                                                                                

मेरे बारे में भी कुछ सोचा करे कोई

उसके गम मेरे मेरी खुशियां उसकी
काश हमसे भी ऐसा सौदा करे कोई

मैं भी बन जाऊं ख्वाहिश किसी की
मेरा नाम हथेली पे लिखा करे कोई

मेरी दीद की प्यासी हो आंखें कहीं
छुप छुप के मुझको भी देखा करे कोई

ज़िक्र जब भी मैं अपनी मौत का करूं
मुंह पे हाथ रख के मुझे रोका करे कोई

मोहब्बत की ये ज़ुबां मुझे भी सिखा दे
मेरे सामने भी आंखों से बोला करे कोई

सौंप दे अपनी ज़िन्दगी “अर्श” मेरे हाथों में
काश मुझ पे भी इतना भरोसा करे कोई

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 


आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
1 year ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X