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मुश्किलें आएंगी तूफान बनकर

                
                                                                                 
                            मुश्किलें आयेंगी तूफान बनकर
                                                                                                

मैं भी खड़ा रहूंगा चट्टान बनकर

तुम करो मज़हब की ठेकेदारी
मैं तो बहुत खुश हूं इंसान बनकर

सूरत से शख्सियत ज़ाहिर नहीं होती
किरदार ही चलेगा पहचान बनकर

गमो से इस क़दर परेशान क्या होना
ये भी आते हैं बस मेहमान बनकर

जहां भी जाऊं तेरे हिसार में रहता हूं
तू छा गई है मुझपे आसमान बनकर

वो जो कभी दिल से अपना कहता था
अब मिलता है “अर्श” अनजान बनकर
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1 month ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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