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सच सुनने के कुव्वत है

                
                                                                                 
                            चलो माना कि तुम्हें हमसे मोहब्बत है
                                                                                                

मगर ज़माने से टकराने की जुर्रत है

हम वादा कर भी लें आने का लेकिन
क्या तुम्हें हमसे मिलने की फुर्सत है

मैं सच कहने की हिम्मत कर तो लूं "अर्श"
क्या तुम में सच सुनने की कुव्वत है

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।

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1 year ago

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