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बर्बाद हो गया

                
                                                                                 
                            इश्क में ये दो नाम ईजाद हो गया,
                                                                                                

कोई आबाद कोई बर्बाद हो गया| 

होना था जो वो तो पहले ही हो चुका,
जो नही होना था इसके बाद हो गया |

आया कु-ए-यार में जो करके वो यकीं,
वो झाँकती रही वो बर्बाद हो गया |

उसकी गली में वो उसी के सामने,
जान दे दी और बस आजाद हो गया |

ये हादसा है वो वो हादसा है ये,
ये हादसा है वो जो कि याद हो गया |

काँटेंं नफरतों के अमृत में पल रहे,
प्रेम के फूलों को जहरबाद हो गया|

-आर्यव्रत आनन्द 'शुभम'

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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1 year ago

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