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प्यार निभाये कोई

                
                                                                                 
                            

पास रहकर के साथ ही निभाये कोई


दूर रहकर दुआ ही बनाये कोई

दूर रहकर तुम्हें ऐसे चाहे कोई
खोलकर आँखे रातें बिताये कोई

प्यार करते हैं तुमको सनम जिस तरह
प्यार करके हमें भी बताये कोई

इश्क करते गये मात खाते गये
आशिकी में किसे आजमाये कोई

आ रही है ये खुशबू कि जैसे कहीं
जुल्फ फैला के पानी सुखाये कोई

तुमने पूछा मेरे पास आते हो क्यों
फूल महके तो भौंरा न आये कोई

अब तो हँसकर वो कहते हैं देखो 'शुभम'
इश्क में दिल कहाँ तक दुखाये कोई

-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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1 year ago

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